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Shukrawar Ke Upay: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार की शाम करें बस ये तीन काम, होगी बरकत

Fri, 25 Apr 2025 11:23 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shukrawar Ke Upay: सप्ताह के शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन देवी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को ऐश्वर्य मिलता है।
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यदि शुक्रवार की शाम को मां लक्ष्मी की उपासना और उन्हें फूल अर्पित किया जाए, तो सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। - फोटो : adobe
Shukrawar Ke Upay: सप्ताह के शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन देवी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को ऐश्वर्य मिलता है। ज्योतिष में शुक्रवार को शुक्र ग्रह से जोड़ा गया है, जिसके प्रभाव से व्यक्ति की सुख-सुविधाओं में वृद्धि, भाग्य का साथ और उसे धन लाभ होता है। मान्यता है कि यदि शुक्रवार की शाम को मां लक्ष्मी की उपासना और उन्हें फूल अर्पित किया जाए, तो सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके अलावा जातक के दुखों का भी अंत होता है। इस दौरान शुक्रवार को तीन काम करने से कुंडली में शुक्र मजबूत और देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शुक्रवार के दिन शाम को पूजा के समय मां लक्ष्मी को सफेद मिठाई का भोग लगाएं। - फोटो : adobe stock
सफेद मिठाई का भोग
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शुक्रवार के दिन शाम को पूजा के समय मां लक्ष्मी को सफेद मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद कन्याओं में इस मिष्ठान को प्रसाद के रूप में बांट दें। ऐसा करने पर कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है। साथ ही वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है।
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शुक्रवार के दिन विवाहित महिलाओं को श्रृंगार का सामान दान करें - फोटो : adobe stock
दान करें
यदि वैवाहिक जीवन में समस्याएं चल रही हैं, तो आप शुक्रवार के दिन विवाहित महिलाओं को श्रृंगार का सामान दान करें। मान्यता है कि इससे रिश्तों में मधुरता आती हैं।
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मां लक्ष्मी की आरती - फोटो : adobe stock
इस आरती से करें पूजा
शुक्रवार के दिन यदि मां लक्ष्मी की पूजा में उनकी संपूर्ण आरती की जाए, तो वह प्रसन्न होती हैं और घर में बरकत होने लगती है। ऐसे में आप इस आरती को जरुर पढ़ें..
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मां लक्ष्मी की आरती 

ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। 
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। 
मैया सुख संपत्ति दाता। 
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता। 
मैया तुम ही शुभदाता। 
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। 
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। 
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। 
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता। 
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

ऊं  जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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