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shradha paksha 2020: श्राद्ध में जरूरी होती हैं ये पांच चीजें, इन्हीं से होता है पितरों का तर्पण

Tue, 08 Sep 2020 07:17 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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पितृ पक्ष 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
यह पितृ पक्ष का समय चल रहा है और इन दिनों पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु लोक से पितृदेव धरती लोक में आते हैं। उन्हीं के लिए श्राद्ध कर्म किये जाते हैं। लेकिन श्राद्ध कर्म तब तक पूरा नहीं होता है जब तक उसमें पांच चीजें शामिल न की जाएं। श्राद्ध में ये पांच चीजें बेहद जरूरी मानी जाती हैं। आइए जानते हैं ये पांच चीजें कौन-कौनसी हैं...
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तिल
पितृ पक्ष में तिल का है विशेष महत्व
पितृ पक्ष में तिल का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि तिल का संबंध भगवान विष्णु जी से है। तिल भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न हुआ था। इसलिए तिल को पवित्र माना जाता है। तिल से श्राद्ध करने पर पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। तिल का दान करने से दानव, असुर दैत्य भी भाग जाते हैं।
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पितृ पक्ष 2020
पितरों के लिए प्रथम भोज है अक्षत
श्राद्ध में अक्षत जरूर चढ़ाना चाहिए। यह पितरों के लिए सबसे पहला भोज माना जाता है। अक्षत मिलाकर ही पिंड तैयार किया जाता है। चावल के बने पिंड से पितर लंबे समय तक संतुष्ट रहते हैं। 

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पितृ पक्ष 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
श्राद्ध में कुश से दिया जाता है पितरों को जल
श्राद्ध में कुश भी जरूरी है। कुश का अर्थ घास होता है। हिन्दू पूजा-पाठ में कुश को पवित्र मानकर प्रयोग किया जाता है। पौराणिक शास्त्रों में कुश को लेकर ऐसा कहा गया है कि कुश का जन्म भगवान विष्णु के रोम से हुआ है। कुश से दिया गया जल सीधे पितरों को प्राप्त होता है।
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श्राद्ध पक्ष 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
जल से मिलती है पितरों को संतुष्टि
श्राद्ध में संतान द्वारा दिया गया जल पितरों के लिए अमृत के समान होता है। इस जल से उन्हें संतुष्टि मिलती है। शास्त्रों के अनुसार जल ही है जो जन्म से लेकर मोक्ष तक साथ देता है। 
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श्राद्ध पक्ष 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
श्राद्ध में श्रद्धा है सबसे अहम
पितरों का तर्पण पूरी श्रद्धा भाव से किया जाना चाहिए। क्योंकि श्राद्ध में सबसे जरूरी है श्रद्धा और ये श्रद्धा पितरों के निमित्त होनी चाहिए। बिना श्रद्धा के दिया हुआ श्राद्ध पितरों को नहीं प्राप्त होता है। उनकी आत्मा को भी संतुष्टि नहीं मिलती है और न ही उनका आशीर्वाद संतान को प्राप्त होता है।
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