पितृ पक्ष का महत्व
- फोटो : adobe stock
श्राद्ध का संदेश बहुत स्पष्ट है, जीवन क्षणभंगुर है, परंतु स्मृतियाँ और संस्कार अमर रहते हैं। आज जब हम अपने पितरों को याद करते हैं और उनके मूल्यों को आगे बढ़ाते हैं, तभी श्राद्ध का सच्चा उद्देश्य पूरा होता है। इसे अशुभ मानना केवल भ्रांति है। वास्तव में यह एक ऐसा पर्व है जो हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और कृतज्ञता का भाव जगाता है। अतः श्राद्ध को औपचारिकता नहीं, बल्कि श्रद्धा और प्रेम से मनाना ही इसका असली स्वरूप है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।