Shradh in Gaya: भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष के पंद्रह दिनों को ही पितृपक्ष कहा जाता है। इस बार पितृपक्ष का प्रारंभ 10 सितंबर से हो चुका है। पितृ पक्ष के दिनों में लोग अपने पूर्वजों की मृत्युतिथि पर श्राद्ध संपन्न कराते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पिंडदान सीधे पितरों तक पहुंचता है। माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान यमराज भी पितरों की आत्मा को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे धरती पर अपने वंशजों के बीच रहकर अन्न और जल ग्रहण कर संतुष्ट हो सकें। पितृपक्ष के दिनों में लोग अपने पितरों को याद कर उनके नाम पर उनका पिंडदान कर्म, तर्पण और दान आदि करते हैं। मान्यता है कि जब लोग अपना शरीर त्याग कर चले जाते हैं, तब उनकी आत्मा की शांति के लिए गयाजी में श्रद्धा से पिंडदान और तर्पण किया जाता है। कहते हैं गयाजी में पिंडदान करने से पितरों को शक्ति मिलती है और वह शक्ति पितरों को परलोक पहुंचाने में मदद करती है। पिंडदान व श्राद्ध कर्म में बिहार का गया तीर्थ सर्वोपरि है। आइए जानते हैं गयाजी में श्राद्ध कर्म करने के पीछे के कारण