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Shivling Jalabhishek Niyam: भगवान शिव को किस लोटे से चढ़ाना चाहिए जल ? जानें इसके नियम

Fri, 09 Jan 2026 04:17 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shivling Jalabhishek Niyam: शिवलिंग पर जल चढ़ाने से महादेव प्रसन्न होते हैं और साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, आखिर महादेव को किस लोटे से जल चढ़ाना चाहिए ? अगर नहीं तो आइए जानते हैं।
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Shivling Jalabhishek Niyam - फोटो : अमर उजाला
Shivling Jalabhishek Niyam: हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि, यदि सच्चे मन से  महादेव को केवल एक लोटा जल चढ़ाया जाए, तो व्यक्ति के जीवन की अनेक समस्याएं दूर होती हैं। शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर नियमित रूप से जल अर्पित करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण करते हैं। लेकिन शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कुछ नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए अन्यथा नकारात्मकता का प्रवाह हो सकता है। इस दौरान खासकर शिवलिंग पर किस लोटे से जल अर्पित किया जाना है, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव पूजा के फल पर पड़ता है। ऐसे में आइए जानते हैं शिवलिंग पर जल चढ़ाने के कुछ महत्वपूर्ण नियमों को जान लेते हैं।
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Shivling Jalabhishek Niyam - फोटो : adobe
शिवलिंग पर किस लोटे से चढ़ाएं जल?
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए हमेशा तांबे, चांदी या पीतल के लोटे का प्रयोग करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन धातुओं को शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से युक्त माना गया है। इसलिए ऐसे लोटे से जल अर्पित करने पर महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यही नहीं व्यक्ति के मानसिक तनाव में भी कमी आती हैं और वह कई बाधाओं से मुक्त महसूस करता है।
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Shivling Jalabhishek Niyam - फोटो : adobe
इस लोटे से न चढ़ाएं जल
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, शिवलिंग पर भूलकर भी स्टील या एल्युमिनियम के लोटे से जल नहीं चढ़ाना चाहिए। यह अशुभ हो सकता है और आपकी पूजा पर इसका नकारात्मक प्रभाव होने की आंशंका भी बनी रहती है। कहते हैं कि, इन धातुओं का प्रयोग करने से व्यक्ति को जीवन में अनावश्यक परेशानियों व बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

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Shivling Jalabhishek Niyam - फोटो : adobe
क्या है शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही नियम ?
  • शास्त्रों के मुताबिक, शिवलिंग पर जल हमेशा एक ही धार में चढ़ाना चाहिए। 
  • अगर आपके जल की धार बीच में टूट जाए, तो उस समय जल अर्पित न करें।
  • जल चढ़ाते समय जलाधारी से लेकर गणेश जी, कार्तिकेय और अशोक सुंदरी के स्थान से होते हुए शिवलिंग के ऊपरी भाग पर धीरे-धीरे जल अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय उसकी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसे शास्त्रों में वर्जित बताया गया है।
  • जल चढ़ाते समय हमेशा महादेव के मंत्रों का जाप करें और स्वच्छता के साथ महादेव की उपासना करनी चाहिए।
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Shivling Jalabhishek Niyam - फोटो : adobe
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!

भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।

शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।'

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
 ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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