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आज नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें पूजन विधि, प्रिय भोग, मंत्र और आरती

Mon, 12 Oct 2026 06:24 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Navratri Day 2 2026: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन देवी को प्रिय भोग अर्पित करने और मंत्र जाप करने का विशेष महत्व माना जाता है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, भोग, मंत्र और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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शारदीय नवरात्रि 2026 - फोटो : amar ujala

Navratri 2026 Day 2: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। इस वर्ष 12 अक्टूबर, सोमवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। देवी का यह स्वरूप तप, त्याग, साधना और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्तों को धैर्य, मानसिक शांति और मुश्किल परिस्थितियों में डटे रहने की प्रेरणा मिलती है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप, पूजा विधि, प्रिय फूल, भोग, मंत्र और शुभ रंग।

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नवरात्रि मां ब्रह्मचारिणी  - फोटो : Amar Ujala

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्व
मां ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। माता का यह रूप कठोर तपस्या, पवित्रता, ज्ञान और वैराग्य का संदेश देता है। ‘ब्रह्मचारिणी’ शब्द का संबंध ब्रह्म के मार्ग पर चलने और तप-साधना करने से माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी की आराधना से व्यक्ति को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, संयम बनाए रखने और कठिन समय में धैर्य से काम लेने की प्रेरणा मिलती है।

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मां ब्रह्मचारिणी - फोटो : adobe

मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग
नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग पहनना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में सफेद रंग शांति, पवित्रता और सरलता का प्रतीक है। इस दिन भक्त सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनकर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कर सकते हैं।

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मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में सफेद और लाल फूल अर्पित करने की परंपरा है। - फोटो : ai

मां ब्रह्मचारिणी को कौन-से फूल चढ़ाएं?
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में सफेद और लाल फूल अर्पित करने की परंपरा है। भक्त माता को चमेली, कमल या गुड़हल का फूल अर्पित कर सकते हैं । पूजा में फूल अर्पित करते समय श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखें।

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मां ब्रह्मचारिणी का भोग - फोटो : Amar Ujala

मां ब्रह्मचारिणी को किस चीज का भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री और शक्कर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा माता को दूध से बनी मिठाइयां, सफेद बर्फी या खीर भी अर्पित की जा सकती है। भोग लगाने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांट सकते हैं।

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मां ब्रह्मचारिणी - फोटो : Amar Ujala

मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र

बीज मंत्र: 
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

ध्यान मंत्र: 
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥देवी स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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मां ब्रह्मचारिणी - फोटो : Amar Ujala

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

  • नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें और मां दुर्गा तथा कलश को प्रणाम करके पूजा शुरू करें।
  • हाथ में जल और अक्षत लेकर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और व्रत का संकल्प करें।
  • देवी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़क सकते हैं।
  • माता को कुमकुम, चंदन, अक्षत, हल्दी और सुगंधित इत्र अर्पित करें।
  • मां ब्रह्मचारिणी को सफेद या पीले फूल अर्पित करें।
  • श्रद्धापूर्वक देवी के मंत्रों का जाप करें। इच्छानुसार 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं।
  • माता को मिश्री, शक्कर, खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग अर्पित करें।
  • पूजा के अंत में मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें और अपनी मनोकामनाओं के साथ सुख-शांति की प्रार्थना करें।
 
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मां ब्रह्मचारिणी - फोटो : Amar Ujala

मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।।

जय गायत्री वेद की माता।\
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।।

कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।।

उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।।

रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।।

आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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