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नवरात्रि में अर्गला स्तोत्र का पाठ क्यों है खास? जानें पाठ करने की सही विधि और लाभ

Thu, 15 Oct 2026 11:03 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में अर्गला स्तोत्र का पाठ करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं अर्गला स्तोत्र का महत्व, इसके लाभ और पाठ करने की सही विधि।

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argala stotram - फोटो : amar ujala

Shardiya Navratri Argala Stotram Lyrics: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और साधना के लिए बेहद खास माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक नवरात्रि मनाई जाती है। इस साल शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक मनाई जा रही है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और देवी मंत्रों व स्तोत्रों का पाठ करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के साथ अर्गला स्तोत्र का पाठ करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से अर्गला स्तोत्र का पाठ करने से भक्त मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं अर्गला स्तोत्र का संपूर्ण पाठ और इसके धार्मिक महत्व के बारे में।

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अथार्गलास्तोत्रम् - फोटो : Adobe Stock

अथार्गलास्तोत्रम्

ॐ अस्य श्रीअर्गलास्तोत्रमन्त्रस्य विष्णुर्ऋषिः,अनुष्टुप् छन्दः,
श्रीमहालक्ष्मीर्देवता, श्रीजगदम्बाप्रीतयेसप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः
ॐ नमश्चण्डिकायै

मार्कण्डेय उवाच

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥1॥
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥2॥
मधुकैटभविद्राविविधातृवरदे नमः।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥3॥
महिषासुरनिर्णाशि भक्तानां सुखदे नमः।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥4॥
रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥5॥
शुम्भस्यैव निशुम्भस्य धूम्राक्षस्य च मर्दिनि।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥6॥
वन्दिताङ्घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥7॥
अचिन्त्यरूपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥8॥
नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥9॥
स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥10॥

चण्डिके सततं ये त्वामर्चयन्तीह भक्तितः।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥11॥
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥12॥
विधेहि द्विषतां नाशं विधेहि बलमुच्चकैः।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥13॥
विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥14॥
सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥15॥
विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तं जनं कुरु।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥16॥
प्रचण्डदैत्यदर्पघ्ने चण्डिके प्रणताय मे।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥17॥
चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंस्तुते परमेश्वरि।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥18॥
कृष्णेन संस्तुते देवि शश्वद्भक्त्या सदाम्बिके।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥19॥
हिमाचलसुतानाथसंस्तुते परमेश्वरि।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥20॥

इन्द्राणीपतिसद्भावपूजिते परमेश्वरि।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥21॥
देवि प्रचण्डदोर्दण्डदैत्यदर्पविनाशिनि।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥22॥
देवि भक्तजनोद्दामदत्तानन्दोदयेऽम्बिके।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥23॥
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥24॥
इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः।
स तु सप्तशतीसङ्ख्यावरमाप्नोति सम्पदाम्॥25॥

इति देव्या अर्गलास्तोत्रं सम्पूर्णम्

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अर्गला स्तोत्र के पाठ का महत्व और लाभ - फोटो : Adobe Stock

अर्गला स्तोत्र के पाठ का महत्व और लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान अर्गला स्तोत्र का पाठ करना मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का एक विशेष माध्यम माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करने से कार्यों में सफलता, बाधाओं से मुक्ति और शत्रुओं पर विजय पाने का आशीर्वाद मिलता है। अर्गला स्तोत्र में मां दुर्गा से रूप, जय, यश और विजय सहित सुख-समृद्धि प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है। इसके नियमित पाठ से मन में सकारात्मकता, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होने की मान्यता है। नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ अर्गला स्तोत्र का पाठ करके भक्त अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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