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Shardiya Navratri 2022: नवरात्रि में क्यों नहीं खाना चाहिए लहसुन और प्याज, जानिए क्या है मान्यता

Mon, 26 Sep 2022 10:50 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नवरात्रि में क्यों नहीं खाना चाहिए लहसुन और प्याज - फोटो : iStock
Shardiya Navratri 2022: इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 26 सितंबर 2022 से हो रही है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में माता रानी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मंदिरों, घरों और भव्य पंडालों में कलश स्थापना की जाएगी और माता अंबे की उपासना की जाएगी। नवरात्रि में लोग उपवास रहकर मां जगदंबे की विधि-विधान से पूजा करते हैं। अपनी श्रद्धा और शक्ति के अनुसार कुछ लोग पूरे नौ दिन, तो कुछ लोग पहले और आखिरी दिन व्रत रखते हैं। वहीं जो लोग नवरात्रि के दिनों में व्रत नहीं रखते हैं, उन्हें इस दौरान सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। नवरात्रि के पावन दिनों में लहसुन-प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि में लहसुन-प्याज का सेवन करना वर्जित माना गया है। तो चलिए जानते हैं कि नवरात्रि में आखिर क्यों वर्जित है प्याज-लहसुन खाना? 
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नवरात्रि में क्यों नहीं खाना चाहिए लहसुन और प्याज - फोटो : istock
नवरात्रि के नौ दिनों में लहसुन और प्याज का सेवन करना वर्जित होता है, क्योंकि लहसुन और प्याज को तामसिक प्रकृति का भोज्य पदार्थ माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, इसके सेवन से अज्ञानता और वासना में बढ़ोतरी होती है। 
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नवरात्रि में क्यों नहीं खाना चाहिए लहसुन और प्याज - फोटो : Pixabay
साथ ही ये भी कहा जाता है कि लहसुन और प्याज जमीन के नीचे उगते हैं। इनकी सफाई में कई सूक्ष्म जीवों की मृत्यु हो जाती है, ऐसे में इन्हें उपवास या शुभ कार्य के दौरान खाना अशुभ माना गया है।

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नवरात्रि में क्यों नहीं खाना चाहिए लहसुन और प्याज - फोटो : iStock
एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है 
लहसुन और प्याज को न खाने को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कथा के अनुसार, स्वरभानु नाम का दैत्य था, जिसने समुद्र मंथन के बाद देवताओं के बीच बैठकर छल से अमृत पी लिया था। ये बात जब मोहिनी रूप धारण किए भगवान विष्णु को पता चली, तो उन्होंने अपने चक्र से स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया। स्वरभानु के सिर और धड़ को ही राहु और केतु कहा जाता है। 
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नवरात्रि में क्यों नहीं खाना चाहिए लहसुन और प्याज - फोटो : istock
कहा जाता है कि सिर कटने के बाद स्वरभानु के सिर और धड़ से अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिरीं, जिनसे लहसुन और प्याज की उत्पत्ति हुई। चूंकि, लहसुन और प्याज की उत्पत्ति अमृत की बूंदों से हुई है, इसलिए रोगों को दूर करने में ये दोनों ही कारगर साबित होते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति राक्षस के मुंह से हुई, इसलिए इसे अपवित्र माना गया है। यही वजह है कि पूजा में भी कभी भगवान को लहसुन और प्याज का भोग नहीं लगाया जाता है।
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