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Navratri 2020: नवरात्रि के नौ दिन और माता के नौ स्वरूपों की उपासना और महत्व

Fri, 09 Oct 2020 08:31 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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नवरात्रि 2020
नवरात्रि में नौ दिनों तक मां के नौ स्वरुपों मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महगौरी, मां सिद्धिदात्री की पूजा क्रमानुसार की जाती है। मां के ये स्परुप अत्यंत कल्याणकारी और हर विपदा को हरने वाले हैं। मां के इन नौं स्वरुपों का अलग-अलग महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों तक व्रत और पूजन करने वाले साधक का मन हर दिन अलग चक्र में स्थापित होता है। जानते हैं कि किस दिन साधक का मन किस चक्र में स्थापित रहता है।
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navratri 2020 मां शैलपुत्री
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना के साथ मां के प्रथम स्परुप शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है। राजा हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। ये वृषभ पर विराजती हैं इनके दाएं हाथ में त्रिशूल तो बाएं हाथ में कमल रहता है इनका स्वरुप बहुत मनमोहक लगता है। नवरात्रि के प्रथम दिन साधक का मन मूलाधार चक्र में स्थापित होता है।
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navratri 2020 मां ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि में दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इनके नाम का अर्थ तप का आचरण करने वाली है। इनका स्वरुप तेजमय और अत्यंत भव्य है। ये अपने दाएं हाथ में कमंडल दो बाएं हाथ में माला धारण करती हैं। इस दिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र में रहता है।

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navratri puja 2020 मां चंद्रघटा
मां चंद्रघंटा का पूजन नवरात्रि को तीसरे दिन किया जाता है मां अपने माथे पर अर्द्ध चंद्र धारण करती हैं। जिसके कारण इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। इनके घंटे की ध्वनि से सभी बुरी शक्तियां डर कर दूर भागती हैं। ये सिंह पर विराजती हैं, इनका शरीर स्वर्ण के समान चमकीला है। इनकी पूजा वाले दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में स्थापित होता है।
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navratri 2020 कूष्मांडा माता
मां के चौथे स्वरुप को कूष्मांडा कहा जाता है। कहते है जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार था, तब इन्होंने ही अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। जिसके कारण इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। मां कूष्मांडा के पूजन के दिन साधक का मन अनाहत चक्र में स्थापित होता है।
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navratri 2020 मां स्कंदमाता
मां दुर्गा की पंचम स्वरुप को स्कंद माता के नाम से जाना जाता है। मां की चार भुजाएं हैं दांयी तरफ की ऊपर वाली भुजा से मां अपनी गोद में स्कंद यानि कुमार कार्तिकेय को पकड़े हुए हैं, एवं नीचे वाली भुजा में कमल को धारण किया है तो वहीं बांयी ओर की ऊपर वाली भुजा से मां आशीर्वदा मुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में मां ने कमल के पुष्प को धारण किया है। मां का यह स्परुप परम सुखों को देने वाला है। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में स्थापित रहता है।
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navratri 2020 मां कात्यायनी
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी के पूजन का प्रावधान होता है। इन्होंने कात्यायन ऋषि के यहां कन्या के रुप में जन्म लिया था। जिसके कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा। नवरात्रि के छठे दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थापित रहता है। इस दिन साधक को औलोकिक तेज की प्राप्ति होती है।

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navratri 2020 मां कालरात्री
मां कालरात्रि का पूजन नवरात्रि के सप्तम दिन किया जाता है। इनक स्वरुप देखने में भयानक है, परंतु इनका यह स्वरुप अत्यंत शुभ फल देने वाला कल्याणकारी है। मां के इस स्वरुप से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। इनकी पूजा वाले दिन साधक का मन सहस्त्रार चक्र में स्थापित होता है। साधक समस्त तरह के भय से मुक्त हो जाता है और उसके लिए समस्त सिद्धियों के द्वार खुलने लगते हैं।

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navratri 2020 मां महागौरी
नवरात्रि के आंठवे दिन मां महागौरी का पूजन किया जाता है। मां महागौरी के पूजन से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। इस स्वरुप में मां गौर वर्ण में हैं इसलिए इन्हें गौरी की संज्ञा दी गई है। मां महागौरी को अन्नपूर्णा भी कहा जाता है। इनकी पूजा वाले दिन साधक का मन सोम चक्र में स्थापित होता है।
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navratri 2020 मां सिद्धिदात्री
नवरात्रि के समापन या नवमी तिथि वाले दिन मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। मां सिद्धिदात्री समस्त कार्यों में सिद्धि प्रदान करने वाली हैं। इनके पूजन से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इन्हीं की कृपा से ही शिव जी को समस्त सिद्धियां प्राप्त हुई थी। मां सिद्धिदात्री से ही शिव जी अर्द्धनारीश्वर कहलाए।
 
 
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