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Sharad Purnima 2026: व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज? जानें फलाहार से पारण तक के नियम

Thu, 22 Oct 2026 11:10 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा का व्रत धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले लोगों को खानपान से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा व्रत में क्या खाना चाहिए, किन चीजों से परहेज करना चाहिए और व्रत का पारण कैसे करें।
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शरद पूर्णिमा 2026 - फोटो : amar ujala

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाला पर्व है। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की आराधना करने और श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले लोग अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखते हैं और सात्विक भोजन को प्राथमिकता देते हैं। साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। ऐसे में अगर आप भी इस दिन व्रत रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो जानिए व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए, किन चीजों से बचना चाहिए और व्रत का पारण कब करना उचित रहेगा।

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शरद पूर्णिमा के व्रत में क्या खाना चाहिए? - फोटो : ai

शरद पूर्णिमा के व्रत में क्या खाना चाहिए?

  • शरद पूर्णिमा के व्रत में खान-पान का चुनाव अपनी धार्मिक परंपरा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। कई परिवारों में इस दिन फलाहार किया जाता है, जबकि कुछ लोग अपनी मान्यताओं के अनुसार पूरे दिन उपवास रखते हैं। व्रत के दौरान हल्का और सात्विक भोजन करना बेहतर माना जाता है।
  • व्रत के दौरान सेब, केला, अनार, पपीता और अन्य ताजे फलों का सेवन किया जा सकता है। फल शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं। अगर आप लंबे समय तक उपवास कर रहे हैं, तो अपनी सेहत के अनुसार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फल खाना उपयोगी हो सकता है।
  • शरद पूर्णिमा पर दूध, दही और अन्य दुग्ध उत्पादों का सेवन कई परिवारों में किया जाता है। दूध से शरीर को प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है। हालांकि, जिन लोगों को दूध से एलर्जी या इसे पचाने में परेशानी होती है, उन्हें इसका सेवन अपनी सहनशीलता के अनुसार करना चाहिए।
  • व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी रोटी, पूरी या अन्य हल्के व्यंजन खा सकते हैं। आलू और अन्य व्रत में स्वीकार्य सब्जियों से भी भोजन तैयार किया जा सकता है। कोशिश करें कि भोजन बहुत अधिक तला हुआ न हो, ताकि पेट पर ज्यादा दबाव न पड़े।
  • मखाने, बादाम, अखरोट और किशमिश जैसे मेवे व्रत के दौरान ऊर्जा पाने का अच्छा विकल्प हो सकते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में दूध या फल के साथ लिया जा सकता है। अगर आपको किसी मेवे से एलर्जी है, तो उसका सेवन न करें।
  • अगर आप फलाहार वाला व्रत रख रहे हैं और आपकी परंपरा में पानी पीने की अनुमति है, तो दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। नारियल पानी या ताजे फलों का रस भी लिया जा सकता है। इससे शरीर में पानी की कमी होने का खतरा कम होता है। निर्जला व्रत रखने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखें, खासकर यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है।
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शरद पूर्णिमा के व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए? - फोटो : ai

शरद पूर्णिमा के व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?

  • शरद पूर्णिमा पर सात्विक आहार को प्राथमिकता देने की परंपरा है। व्रत के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है। हालांकि, खान-पान के नियम परिवार, क्षेत्र और व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
  • धार्मिक परंपराओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा के व्रत में मांस, मछली और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता। व्रत रखने वाले लोग इस दिन सात्विक भोजन करते हैं और पूजा-पाठ पर ध्यान देते हैं।
  • व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान शराब तथा अन्य नशीले पदार्थों से परहेज करने की परंपरा है। इस दिन संयमित दिनचर्या अपनाना और मन को शांत रखना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • कई हिंदू परिवारों में व्रत और पूजा के दौरान प्याज तथा लहसुन से बने भोजन से परहेज किया जाता है। इसलिए अगर आप सात्विक आहार के नियमों का पालन करते हैं, तो भोजन बनाते समय इनका इस्तेमाल न करें।
  • व्रत में पकौड़े, चिप्स और अधिक तेल में बने व्यंजनों का जरूरत से ज्यादा सेवन करने से बचना चाहिए। ऐसे खाद्य पदार्थ पेट में भारीपन और एसिडिटी की परेशानी बढ़ा सकते हैं। इसकी जगह उबले आलू, फल, दूध या हल्के फलाहार को प्राथमिकता देना बेहतर हो सकता है।
  • व्रत के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा ताजा और अच्छी तरह तैयार किया हुआ भोजन ही खाएं। खासकर दूध और दूध से बनी चीजों को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर रखने से बचें, क्योंकि इनके खराब होने का खतरा रहता है।

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शरद पूर्णिमा पर खीर खाने और बनाने की क्या परंपरा है? - फोटो : अमर उजाला

शरद पूर्णिमा पर खीर खाने और बनाने की क्या परंपरा है?
शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाने और उसे चांदनी में रखने की परंपरा काफी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान होती हैं। इसी विश्वास के चलते दूध, चावल और चीनी से बनी खीर को रात में चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा भी कई स्थानों पर निभाई जाती है। इस परंपरा के दौरान खीर को साफ बर्तन में रखकर ढकना बेहतर होता है, ताकि उसमें धूल या कीड़े न पड़ें। हालांकि, चांदनी में रखी खीर के विशेष स्वास्थ्य लाभ होने का पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खीर को लंबे समय तक खुले में रखने से वह खराब हो सकती है, इसलिए खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। इसे सुरक्षित तापमान पर रखें और खराब होने के संकेत मिलने पर सेवन न करें।

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शरद पूर्णिमा 2026 व्रत का पारण कब करें?

शरद पूर्णिमा 2026 व्रत का पारण कब करें?
शरद पूर्णिमा के व्रत का पारण करने का समय व्रत की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026, सोमवार को सुबह 9:41 बजे से पहले पारण का समय बताया गया है। हालांकि, इस समय की पुष्टि अपने क्षेत्र के पंचांग से जरूर कर लें, क्योंकि पारण के नियम और समय अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। पारण करते समय सबसे पहले पूजा-अर्चना करें और फिर अपनी परंपरा के अनुसार भोजन ग्रहण करें। लंबे समय तक उपवास रखने के बाद अचानक बहुत अधिक भोजन करने के बजाय हल्का भोजन करना बेहतर होता है।

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शरद पूर्णिमा के व्रत में नियमों का पालन क्यों जरूरी है? - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

शरद पूर्णिमा के व्रत में नियमों का पालन क्यों जरूरी है?
धार्मिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा का व्रत श्रद्धा, संयम और भक्ति से जुड़ा माना जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करते हैं, जरूरतमंदों को दान देते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करते हैं। कुछ स्थानों पर रात में जागरण करके मां लक्ष्मी की आराधना करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा-पाठ और व्रत करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस दिन क्रोध से बचने, दूसरों के प्रति अच्छा व्यवहार करने और जरूरतमंदों की सहायता करने पर भी जोर दिया जाता है। हालांकि, व्रत के नियमों का पालन करते समय अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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