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दिवाली से पहले इस दिन भी आती हैं मां लक्ष्मी आपके घर, देती हैं सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

Tue, 27 Oct 2020 07:09 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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शुभ शरद पूर्णिमा
Sharad Purnima Importance And Significance: कुछ ही दिनों में दीपावली का त्योहार आने वाला है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। दिवाली पर लक्ष्मीजी और भगवान गणेश की पूजा कर सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। दिवाली से पहले देवी लक्ष्मी बैकुंठधाम से पृथ्वी पर आती हैं। जिस दिन देवी लक्ष्मी धरती पर आती हैं हिंदू पंचांग के अनुसार वह दिन आश्विन मास की पूर्णिमा होती है। मान्यता है कि देवी लक्ष्मी शरद पूर्णिमा के दिन घर-घर जाकर देखती हैं कि कौन जग रहा है। इस बार शरद पूर्णिमा 30 अक्तूबर को है। सभी पूर्णिमाओं में शरद पूर्णिमा को बेहद खास मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं में होते हैं और पृथ्वी पर अमृत तुल्य  किरणों से माध्यम से वर्षा करते हैं। शरद पूर्णिमा पर सुख और सौभाग्य प्राप्त करने के लिए इस दिन रात्रि जागरण कर मंत्रों का जप करना होता है।
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शरद पूर्णिमा
अश्विन मास की पूर्णिमा को कई नामों से जाना जाता है। जिसमें आश्विन पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा और कौमुदी व्रत आदि के नामों से जाना जाता है। शरद पूर्णिमा बहुत ही महत्वपूर्ण होती है इस दिन चांद की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी के बहुत ही करीब आ जाने के कारण यह बहुत ही खूबसूरत दिखाई देता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तिथि पर धन की देवी मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। दरअसल देवता और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी प्रगट हुई थीं जिस वजह से शरद पूर्णिमा की तिथि पर देवी लक्ष्मी की जयंती के रूप में मनाई जाती है।
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शरद पूर्णिमा 2020
शरद पूर्णिमा के दिन कई जगहों पर देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा होती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु संग पृथ्वी पर भ्रमण करने आती हैं। साथ ही सभी देवी-देवता शरद पूर्णिमा पर चांद की 16 कलाओं को देखने के लिए पृथ्वी पर आते हैं।

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Goddess Laxmi - फोटो : Social Media
शरद पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी पृथ्वीलोक पर आकर घर-घर में जाकर यह देखती हैं कि कौन जग रहा है और कौन सो रहा है। जिन घरों में लोग शरद पूर्णिमा वाली रात में सोते रहते हैं वहां लक्ष्मी वापस चली जाती हैं। वहीं जिन घरों में लोग जगते हैं रहते हैं वहां पर माता लक्ष्मी आती हैं और उन्हें धन और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। रात में जगने के कारण इसे कोजगारी पूर्णिमा कहते हैं। साथ ही यह भी मान्यता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करने पर कर्जों से मुक्ति मिल जाती है।
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laxmi
शरद पूर्णिमा की रात को चांद की रोशनी में खीर बनाकर छत पर रखने की परंपरा है और उसे सुबह-सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर चांद अपनी 16 कलाओं से पृथ्वी पर अपनी किरणों के माध्यम से अमृत के कण के बारिश के रूप में गिराता है।  शरद पूर्णिमा पर रात को निकलने वाली चांद की किरणें बहुत ही लाभकारी होती है। मान्यता के अनुसार इस दिन दूध से बने उत्पाद का चांदी के पात्र में सेवन करना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। 
 
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