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शरद पूर्णिमा पर जरूर करें मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की आरती, जानें पूजा का महत्व

Sat, 24 Oct 2026 11:09 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व है। जानिए इस दिन पूजा को पूर्ण करने के लिए इन तीनों देवी-देवताओं की आरती और उनका धार्मिक महत्व।
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शरद पूर्णिमा 2026 - फोटो : amar ujala

Sharad Purnima 2026: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। इस अवसर पर कोजागरी पूजा, खीर बनाने और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के अंत में आरती करने का विशेष महत्व होता है। ऐसे में आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा पर किन देवी-देवताओं की आरती करनी चाहिए और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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मां लक्ष्मी की आरती  - फोटो : amar ujala

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की आरती का महत्व
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा धन, वैभव और सुख-समृद्धि की कामना के लिए की जाती है। इस दिन शाम के समय पूजा स्थल की साफ-सफाई करके दीपक जलाएं और माता को फूल, फल तथा मिठाई अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की आरती करें।

मां लक्ष्मी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
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विष्णु जी की आरती - फोटो : ai

शरद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की आरती
मां लक्ष्मी को भगवान विष्णु की अर्धांगिनी माना जाता है। इसलिए शरद पूर्णिमा पर माता के साथ भगवान विष्णु की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को तुलसी दल और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद उनकी आरती करके परिवार की सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना करें।

भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
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चंद्रदेव की आरती - फोटो : amar ujala

शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव की आरती क्यों करें?
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। भक्त चंद्रदेव को जल अर्पित करके सुख-शांति और मानसिक प्रसन्नता की कामना करते हैं। इस अवसर पर खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा भी है।

चंद्रदेव की आरती

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी॥
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।
दीन दयाल दयानिधि, भव बंधन हारी॥
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि॥
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, संत करें सेवा॥
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी॥
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे॥
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें॥
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा॥

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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