पुराणों में बताया गया है कि देवी लक्ष्मी का वाहन उल्लू है इसलिए देवी लक्ष्मी रात के समय भ्रमण करने के लिए निकलती हैं। ऐसी मान्यता है कि साल की कुछ खास रातें हैं जब देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों पर कृपा करती हैं। इनमें एक रात तो दीपावली की मानी जाती है और दूसरी रात शरद पूर्णिमा की मानी जाती है।
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इस रात सोने का मतलब है घर आई लक्ष्मी को खोना, इसलिए जागते रहें
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शास्त्रों और पुराणों में तो यह भी बताया गया है कि धन की इच्छा रखने वालों के लिए दीपावली से भी अधिक महत्वपूर्ण शरद पूर्णिमा की रात है। इसलिए इस कोजागरा यानी कौन जाग रहा है की रात भी कहते हैं।
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इस रात सोने का मतलब है घर आई लक्ष्मी को खोना, इसलिए जागते रहें
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माना जाता है कि जो व्यक्ति इस रात में जागरण करके देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा अराधना करते हैं देवी लक्ष्मी उनका घर धन-धान्य से भर देती है।
इस रात सोने का मतलब है घर आई लक्ष्मी को खोना, इसलिए जागते रहें
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इस रात का इसलिए भी विशेष महत्व है क्योंकि राधा रूप में देवी लक्ष्मी और श्री कृष्ण रूप में भगवान विष्णु ने इसी रात को महारास किया था। इसलिए यह श्री कृष्ण और राधा की प्रिय रात है।
इस रात सोने का मतलब है घर आई लक्ष्मी को खोना, इसलिए जागते रहें
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ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात में चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं से संपन्न होकर सबसे साफ और सुंदर दिखता है। इस रात को चन्द्रमा अमृत की वर्षा करता है। इसलिए रात में खीर बनाकर खुले आसमान में रखकर सुबह उसे प्रसाद के रूप में खाया जाता है। कहते हैं इससे रोग मुक्ति होती है और व्यक्ति दीर्घायु होता है।