Shani Sade Sati Upay: ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि वह न्याय करते हुए साधक को शुभ-अशुभ फल देते हैं। उन्हें कर्म, न्याय और अनुशासन का कारक ग्रह भी माना गया है। इसलिए कुंडली में शनि का स्थान विशेष महत्व रखता है। इसका सीधा प्रभाव व्यक्ति के निजी जीवन पर पड़ता है।
यदि कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर हो, तो जातक कर्ज, तनाव व सेहत से जुड़ी समस्याएं झेलता है। इसके अलावा शिक्षा, करियर, बिजनेस और धन अर्जित करने में भी लगातार संघर्ष करना पड़ता है। इस दौरान शनि की साढ़ेसाती होने पर समय और भी कष्टकारी माना जाता है।
बता दें, शनि की साढ़ेसाती होने पर व्यक्ति आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक और शारीरिक दिक्कतों को झेलता है। इसके चलते कार्य को पूरा करने में कठिनाई, असफल यात्राएं और व्यापार में धन हानि जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लेकिन आप कुछ खास उपायों की सहायता से शनि की साढ़ेसाती और दोषों के प्रभाव को कम कर सकते हैं। आइए इसके बारे में जानते हैं।