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Shani Jayanti: सरसों तेल, काले तिल और दीपक के बिना अधूरी मानी जाती है पूजा, जानें इन चीजों का महत्व

Fri, 15 May 2026 12:58 AM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

शनि जयंती पर सरसों तेल, काले तिल और दीपक का विशेष महत्व माना जाता है। ये उपाय नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर शनि देव की कृपा, शांति, सुख और समृद्धि प्राप्त करने में सहायक माने जाते हैं।
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Shani Jayanti 2026 - फोटो : अमर उजाला
Shani Jayanti Importance:  हिंदू पंचांग के अनुसार शनि जयंती का पर्व हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। यह दिन न्याय के देवता शनि देव के जन्मोत्सव के रूप में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। शनि देव को कर्मफल दाता माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि शनि जयंती पर व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की कठिनाइयों में कमी आती है तथा ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं। इस अवसर पर भक्त अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
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ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को प्रातः 05:11 मिनट से शुरू होकर 17 मई 2026 को देर रात 01: 30 मिनट पर - फोटो : self
शनि जयंती की तिथि 
द्रिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को प्रातः 05:11 मिनट से शुरू होकर 17 मई 2026 को देर रात 01: 30 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू परंपरा में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए शनि जयंती 16 मई 2026, शनिवार के दिन मनाई जाएगी। चूंकि यह दिन स्वयं शनिवार है, जो शनि देव का वार माना जाता है, इसलिए इस बार का संयोग विशेष रूप से शुभ और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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सरसों का तेल शनि देव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। - फोटो : AdobeStock
सरसों का तेल
सरसों का तेल शनि देव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसे अर्पित करने या इसका दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और ग्रह दोष शांत होने की मान्यता है। भक्त शनि कृपा प्राप्त करने के लिए इसका विशेष रूप से प्रयोग करते हैं।

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काले तिल का दान भी करते हैं, जिसे अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। - फोटो : Adobe Stock
काले तिल
काले तिल को शनि देव से गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है। इन्हें अर्पित करने से पापों के प्रभाव कम होने और मानसिक शांति मिलने की मान्यता है। कई लोग इस दिन काले तिल का दान भी करते हैं, जिसे अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
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दीपक की लौ शनि देव की कृपा को आकर्षित करती है। - फोटो : adobe stock
दीपक
शनि मंदिरों या पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाना अज्ञान, भय और बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दीपक की लौ शनि देव की कृपा को आकर्षित करती है और जीवन में अनुशासन, स्थिरता तथा सकारात्मक ऊर्जा लाती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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