भोलेनाथ ने सृष्टि की रक्षा करने के लिए विष का पान किया था
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कहते है जब अमृत मंथन में हलाहल विष निकला तो भोलेनाथ ने सृष्टि की रक्षा करने के लिए उस विष का पान किया था। जिसके कारण उनका पूरा शरीर आग की भांति तपने लगा था। शिव जी को इस तपन से राहत देने के लिए इंद्रदेव ने बारिश की थी। यह माह सावन का था। तभी से इस महीने में शिव जी की पूजा-अर्चना करने से वे अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं, और उन्हें कष्टों से बचाते हैं, मान्यता यह भी है कि शिव जी को यह माह इसलिए प्रिय है क्योंकि इसी माह में पार्वती जी ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।