Sawan 2023: आज से लगातार 58 दिनों तक भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-आराधना का सिलसिला चलेगा। सावन का पवित्र महीना आज से शुरू हो चुका है। इस साल सावन का अधिकमास होगा। अधिकमास की वजह से चातुर्मास 4 के बजाय 5 माह का रहेगा। वर्तमान समय में नल संवत्सर 2080 चल रहा है, जो कि 13 महीनों का रहेगा। हिन्दू पंचांग में हर बार करीब तीन साल बाद अधिकमास आता है। इस बार सावन में अधिकमास का योग 19 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 2004 में सावन का अधिकमास था। शिव पूजा और आराधना का खास महीना सावन 4 जुलाई से शुरू हो रहा है और 18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिकमास रहेगा। इसके बाद सावन का शेष महीना शुरू होगा जो कि 31 अगस्त तक रहेगा।
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Sawan 2023
- फोटो : अमर उजाला
इस साल सावन 59 दिनों का होगा। पंचांग के अनुसार 19 साल बाद सावन पर बहुत ही खास संयोग बन रहा है, जिसमें पूरे महीने शिव और माता पार्वती दोनों की असीम कृपा प्राप्त होगी। सावन का महीना शिव भक्तों के लिए बहुत खास रहने वाला है। इस बार सावन का महीने पूरे दो महीने का होगा। दरअसल इस बार मलमास लग जाने का कारण सावन 59 दिनों का हो गया है। ऐसे में शवि भक्तों को सोमवार के दिन महादेव की उपासना करने के लिए पूरे 8 सोमवार मिलेंगे। इस बार सावन महीने की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से होने जा रही है। 31 अगस्त को सावन का समापन होगा। इस बार शिव भक्तों को कुल 59 दिन भगवान शिव की उपासना के लिए मिलेंगे।
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sawan 2023
- फोटो : अमर उजाला
सावन मास पूरा महादेव को समर्पित है, लेकिन अधिकमास के स्वामी श्रीविष्णु हैं, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस बार सावन में पड़ने के कारण यह अधिकमास और भी विशेष हो गया है, क्योंकि इस मास में जो भी जातक निष्ठापूर्वक भगवान का चिंतन-मनन करेगा, उन्हें हरि और हर दोनों की कृपा प्राप्त होगी।
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Surya Gochar
- फोटो : अमर उजाला
अधिकमास में नहीं होता है सूर्य का राशि परिवर्तन
अधिकमास में सूर्य संक्राति नहीं होती है। इस बार 16 जुलाई को कर्क संक्रांति और 18 से सावन का अधिकमास शुरू होगा। 16 अगस्त को अधिकमास खत्म होगा और 17 तारीख को सिंह संक्रांति रहेगी। अधिकमास को अधिमास, मलमास और पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं।
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मलमास क्यों कहते हैं?
अधिकमास में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। इस महीने में सूर्य संक्राति नहीं होती है। इस कारण इस महीने को मलिन माह यानी मलमास माना गया है। मलमास में नामकरण, यज्ञोपवित जैसे संस्कार भी नहीं किए जाते हैं।
पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं?
इस संबंध में प्रचलित कथा के अनुसार अधिकमास को शुभ नहीं माना जाता था। इस कारण कोई भी देवता इस महीने का स्वामी नहीं बनना चाहता था। तब अधिकमास ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। अधिकमास की प्रार्थना सुनकर विष्णु जी ने इस महीने को खुद का सर्वश्रेष्ठ नाम पुरुषोत्तम नाम दिया। तब से इस माह को पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा। इस महीने में भागवत कथा पढ़ना-सुनना, मंत्र जप, पूजन, धार्मिक अनुष्ठान, दान आदि शुभ कर्म किए जाते हैं।