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Kanwar Yatra: क्या आप जानते हैं सबसे पहला कांवड़िया कौन था? जानिए कैसे हुई कांवड़ यात्रा की शुरुआत

Thu, 22 Jun 2023 09:42 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Kanwar Yatra History: जानिए सबसे पहला कांवडिया कौन था - फोटो : अमर उजाला
Sawan Kanwar Yatra 2023: इस साल 4 जुलाई 2023 से शिव जी के प्रिय माह सावन की शुरुआत हो रही है। सावन का महीना शुरू होते ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है। सावन के महीने में पूरे उत्तर भारत और अन्य राज्यों से कांवड़िये किसी पवित्र धाम जाते हैं और वहां से गंगाजल लाकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों को सैकड़ों किलोमीटर दूर तक नंगे पैर ही चलना होता है। यात्रा के दौरान कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता है। यात्रा के दौरान शिव भक्त अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए गंगा जल लाते हैं और उससे भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आखिर कांवड़ यात्रा की शुरुआत कब से हुई या पहला कांवड़िया कौन था? तो चलिए हम आपको बताते हैं पहले कांवड़िये का नाम और इससे जुड़ी दिलचस्प कथा... 

Kanwar Yatra 2023: कब से शुरू हो रही है कांवड़ यात्रा? ये है शिव जी को जल चढ़ाने के लिए सबसे शुभ दिन
 
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Kanwar Yatra History: जानिए सबसे पहला कांवडिया कौन था - फोटो : अमर उजाला
आखिर कौन था पहला कांवड़िया
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सहस्त्रबाहु, ऋषि जमदग्नि के यहां पहुंचे थे। ऋषि जमदग्नि ने उनकी सेवा और आदर में जबरदस्त व्यवस्था की। सहस्त्रबाहु भी ऋषि के आदर-सत्कार से बहुत प्रसन्न हुआ परन्तु उसे यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि आखिर एक साधारण एवं गरीब ऋषि उसके और उसकी सेना के लिए इतना सारा खाना कैसे जुटा पाया और वह इसका उत्तर जानने के लिए उतावला हो गया। फिर उसने अपने सवाल का उत्तर जानने के लिए अपने सैनिकों को काम पर लगा दिया। 
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Kanwar Yatra History: जानिए सबसे पहला कांवडिया कौन था - फोटो : अमर उजाला
आखिरकार उसके सवाल का जवाब ढूंढ ही लिया। सैनिकों ने सहस्त्रबाहु को बताया कि ऋषि जमदग्नि के पास एक कामधेनु नाम की दिव्य गाय है, जिससे कुछ भी मांगो, वह सब कुछ प्रदान करती है। जब राजा को यह ज्ञात हुआ कि इसी कामधेनु गाय के कारण ऋषि जमदग्नि संसाधन जुटाने में कामयाब हो पाया तो उस गाय को प्राप्त करने के लिए सहस्त्रबाहु के मन में लालच उत्पन्न हो गया। उसने ऋषि से कामधेनु गाय मांगी परंतु ऋषि जमदग्नि ने कामधेनु गाय देने से मना कर दिया। इस पर सहस्त्रबाहु क्रोधित होकर ऋषि जमदग्नि की हत्या कर दी। 

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Kanwar Yatra History: जानिए सबसे पहला कांवडिया कौन था - फोटो : अमर उजाला
वहीं जब परशुराम को पता चला कि सहस्त्रबाहु ने कामधेनु गाय प्राप्त करने के लिए उनके पिता ऋषि जमदग्नि की हत्या कर दी है तो उन्होंने सहस्त्रबाहु की सभी भुजाओं को काटकर उसकी हत्या कर डाली। इसके बाद परशुराम ने कठोर तपस्या से अपने पिता जमदग्नि को पुनः जीवनदान दिया। जीवित होने के बाद जब ऋषि को यह पता चला कि परशुराम ने सहस्त्रबाहु की हत्या कर दी तो उन्होंने इसके पश्चाताप के लिए परशुराम से भगवान शिव का जलाभिषेक करने को कहा। 
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Kanwar Yatra History: जानिए सबसे पहला कांवडिया कौन था - फोटो : अमर उजाला
पिता की आज्ञा पर परशुराम ने शुरू की थी कांवड़ यात्रा
पिता की आज्ञा को स्वीकार करते हुए परशुराम अनेकों मील दूर नंगे पांव चलकर गंगा जल लेकर आए तथा आश्रम के पास ही शिवलिंग की स्थापना कर महादेव का महाभिषेक किया और उनकी स्तुति की। 
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Kanwar Yatra History: जानिए सबसे पहला कांवडिया कौन था - फोटो : अमर उजाला
रावण को भी माना जाता है पहला कांवड़िया 
कांवड़ यात्रा को लेकर एक और मान्यता प्रचलित है, जिसके अनुसार रावण को पहला कांवड़िया माना जाता है। मान्यतानुसार कांवड़ की परंपरा समुद्र मंथन के समय ही पड़ गई। तब जब मंथन में विष निकला तो संसार इससे त्राहि-त्राहि करने लगा। तब भगवान शिव ने इसे अपने गले में रख लिया, लेकिन इससे शिव के अंदर जो नकारात्मक उर्जा ने जगह बनाई, उसको दूर करने का काम रावण ने किया। रावण ने तप करने के बाद गंगा के जल से पुरा महादेव मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक किया, जिससे शिव इस उर्जा से मुक्त हो गए। 
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