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Sawan 2022 First Day: सावन के पहले दिन इस विधि से करें शिव जी की पूजा, पूरे माह मिलेगा पुण्य फल

Thu, 14 Jul 2022 07:00 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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सावन के पहले दिन इस विधि से करें शिव जी की पूजा - फोटो : अमर उजाला
Sawan 2022 First Date Puja Vidhi: आज से शिव जी के प्रिय माह सावन की शुरुआत हो रही है। हिंदू धर्म में इस महीने को बेहद पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह में शिव जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना करने से भोले शंकर प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के जीवन से सभी कष्टों को हर लेते हैं। आज सावन का पहला दिन है। ऐसे में शिव जी को प्रसन्न करने के लिए किस विधि से पूजा करनी चाहिए? आइए जानते हैं... 

सावन के पहले दिन किस विधि से करें पूजा   

आज सावन का पहला दिन है। ऐसे में आपको किसी शिव मंदिर या फिर घर पर ही शिव जी पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान शिव जी को बेल पत्र और जल चढ़ाएं। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।  
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सावन के पहले दिन इस विधि से करें शिव जी की पूजा - फोटो : iStock
सावन का महीना शिव उपासना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में शिव उपासना से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। शिव जी को सच्चे मन से चढ़ाया गया मात्र एक लोटा जल की काफी होता है। इसलिए इस दिन जलाभिषेक जरूर करें। 
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सावन के पहले दिन इस विधि से करें शिव जी की पूजा - फोटो : iStock
संभव हो सावन के पहले दिन भोलेनाथ के मंदिर में शिव चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से दोगुना पुण्य मिल सकता है। साथ ही पूजा के दौरान भगवान शिव की आरती करें और भोग लगाएं। 

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सावन के पहले दिन इस विधि से करें शिव जी की पूजा - फोटो : iStock
इसके अलावा सावन के पहले दिन यदि पूजा के दौरान शिव जी की आरती भी की जाय तो पूरे माह इसका पुण्य फल मिलता है। नीचे शिव जी की आरती दी जा रही, यहां से आप सावन के पहले दिन आरती पढ़ सकते हैं....    
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सावन के पहले दिन इस विधि से करें शिव जी की पूजा - फोटो : istock

 

ॐ जय शिव ओंकारा… आरती

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

जटा में गंग बहती है, गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा।
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