sawan 2020
'मनसा कर्मणा वाचा न च काड्क्षेत पातकम्।'
अर्थात् किसी भी मनुष्य को मन,वाणी और कर्म से पाप करने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल भोगना पड़ता है। जो धर्म-ग्रंथों के अनुसार पाप मानी गई हो ऐसी बात को भी, मनुष्य को अपने मन में लाना चाहिए, अपने मुख से कोई ऐसी बात नहीं बोलनी चाहिए और न ही ऐसा कोई कार्य करना चाहिए, जिससे दूसरों को कोई दुख पहुंचे या परेशानी हो। पाप कर्म करने वाले मनुष्य को जीवन में तो इसके परिणाम भोगने ही पड़ते हैं, मृत्यु के बाद भी नरक में यातनाएं भोगनी पड़ती हैं।