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अच्छा तो सावन में भगवान शिव की पूजा के ये हैं 5 कारण

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सावन का महीना एक अगस्त से शुरु हो चुका है और इसके साथ ही भोले के भक्तों में नया जोश और उमंग भरना शुरु हो चुका है। शिव भक्त कांवड़ यात्रा के लिए तैयारी में जुट चुके हैं और अब पूरे महीने हर तरफ बम-बम भोले की गूंज सुनाई देने वाली है। इसके पीछे कारण यह है कि सावन भगवान शिव का महीना माना जाता है और इस महीने में शिव की पूजा विशेष फलदायी होती है। ज्योतिषशास्त्री पं. जयगोविंद शास्त्री कहते हैं कि पुराणों में इसके 5 कारण बताए गए हैं।
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सबसे पहला कारण तो यह माना जाता है क‌ि सावन के महीने में ही भगवान श‌िव ने सागर मंथन से प्राप्त हालाहल व‌िष का पान क‌िया था और सृष्ट‌ि की रक्षा की थी। व‌िष के प्रभाव से भगवान श‌िव व्याकुल होने लगे थे और मूर्छ‌ित हो गए थे। श‌िव जी की मूर्छा दूर करने के ल‌िए देवतागण श‌िव जी को जल से स्नान कराने लगे इसल‌िए सावन में भगवन श‌िव को कांवड़ चढ़ाना व‌िशेष पुण्यदायक माना जाता है।
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सावन के महीने में हवाएं ठहर जाती हैं और उमस बढ़ जाती है। ‌ऐसे समय में व‌िषपान के बाद जब श‌िव जी घुटन महसूस करने लगे तब देवताओं ने भगवान श‌िव को पीपल के वृक्ष के नीचे लेटा  द‌िया क्‍योंक‌ि पीपल के पत्ते हल्की हवा में भी ह‌िलते रहते हैं और छाया प्रदान करते हैं। इसल‌िए सावन में पीपल के वृक्ष की पूजा और पीपल के वृक्ष लगाने से भगवान श‌िव प्रसन्न होते हैं।

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सावन का महीना भगवान श‌िव को प्र‌िय है इसका कारण यह भी है क‌ि इस महीने में भगवान श‌िव देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हुए थे और पार्वती को पत्नी रुप में स्वीकार करने का वरदान द‌िया। यही कारण है क‌ि इस महीने में भगवान श‌िव के साथ देवी पार्वती की पूजा की जाती है। सुहागनों के कई व्रत सावन में आते हैं इसके पीछे भी देवी पार्वती और श‌िव के म‌िलन से जुड़ी मान्यताएं शाम‌‌िल हैं।
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सावन में श‌‌िव जी की पूजा का एक बड़ा कारण यह है क‌ि भगवान व‌िष्‍णु शयन में चले जाते हैं ज‌िससे व‌िष्‍णु भगवान के सारे काम भी श‌िव जी के पास आ जाते हैं। इसल‌िए अन्य महीनों की अपेक्षा सावन में श‌िव की पूजा अध‌िक फलदायक मानी जाती है।
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एक मान्यता यह भी है क‌ि भगवान श‌िव सावन में धरती पर रुद्र रूप में वास करते हैं। रुद्र श‌िव का वह स्वरुप है जो खुश हो जाए तो हर मनोकामना झट से पूरी हो जाए और कुप‌ित हो जाए तो सर्वनाश कर दें। इसल‌िए सावन में पूरी धरती श‌िवमय हो जाती है।
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