सर्वपितृ अमावस्या 2026
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सर्वपितृ अमावस्या पर कैसे करें श्राद्ध और तर्पण?
1. स्नान और सूर्य को अर्घ्य दें: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और अपने पूर्वजों का स्मरण करें।
2. तर्पण की तैयारी करें: तांबे के पात्र में जल लें। परंपरा के अनुसार इसमें काले तिल, कुश और अन्य आवश्यक सामग्री रखी जा सकती है। इसके बाद पितरों का ध्यान करते हुए विधिपूर्वक तर्पण करें।
3. पितरों के निमित्त जल अर्पित करें: दक्षिण दिशा को पितरों से संबंधित माना जाता है। इसलिए पारंपरिक विधि के अनुसार दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण किया जाता है। विधि के दौरान परिवार की परंपरा और पुरोहित के निर्देशों का पालन करें।
4. पिंडदान करें: श्राद्ध परंपरा में पके हुए चावल, तिल और अन्य निर्धारित सामग्री से पिंड तैयार किए जाते हैं। इसके बाद पूर्वजों के निमित्त पिंडदान किया जाता है।
5. ब्राह्मण भोजन और सेवा करें: अपनी सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराएं। जरूरतमंदों को भोजन कराना भी पुण्यकारी माना जाता है।
6. पशु-पक्षियों के लिए भोजन निकालें: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों के लिए भोजन निकालने की परंपरा है। इसे पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम माना जाता है।7. क्षमा प्रार्थना करें: पूजा और श्राद्ध कर्म के अंत में अपने पूर्वजों का स्मरण करें और जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगते हुए परिवार की सुख-शांति की कामना करें।