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Basant Panchami 2026: देवी सरस्वती की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां, हो सकती है परेशानी

Thu, 22 Jan 2026 11:00 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Basant Panchami Niyam: वसंत पंचमी 2026 मां सरस्वती की पूजा का विशेष अवसर है, लेकिन इस दिन अनजाने में की गई कुछ गलतियां पूजा के फल को निष्फल कर सकती हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ऐसी भूलें विद्या दोष का कारण बन सकती हैं। सही विधि, सावधानी और श्रद्धा के साथ पूजा करने से मां सरस्वती की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
 
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Basant Panchami 2026 - फोटो : amar ujala
Basant Panchami 2026: साल 2026 में वसंत पंचमी का शुभ पर्व एक बार फिर ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की उपासना का विशेष अवसर लेकर आ रहा है। इस दिन चारों ओर पीले रंग की छटा, खिले हुए सरसों के खेत और प्रकृति का नववसंत मन को आनंदित कर देता है। वसंत पंचमी को विद्या, सृजन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है।
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हालांकि, धर्म सिंधु और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में यह भी बताया गया है कि वसंत पंचमी के दिन पूजा में कुछ विशेष गलतियां करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होते। इतना ही नहीं, ऐसी भूलें करने से ‘विद्या दोष’ लगने की भी आशंका रहती है। अक्सर श्रद्धा और उत्साह में हम कुछ ऐसी बातें नजरअंदाज कर देते हैं, जो मां शारदा को अप्रसन्न कर सकती हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि वसंत पंचमी के दिन किन कार्यों से बचना चाहिए, ताकि मां सरस्वती की कृपा सदैव बनी रहे।
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काले या गहरे रंग के कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता। - फोटो : AdobeStock
 काले रंग के वस्त्र पहनने से करें परहेज
वसंत पंचमी को परंपरागत रूप से “पीले रंग का पर्व” माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन काले या गहरे रंग के कपड़े पहनना शुभ नहीं माना जाता। काला रंग नकारात्मकता, उदासी और शोक का प्रतीक समझा जाता है, जबकि वसंत पंचमी उत्साह, ज्ञान और नई ऊर्जा का पर्व है। मां सरस्वती को विशेष रूप से पीला और सफेद रंग प्रिय है, जो पवित्रता, ज्ञान और सकारात्मकता का संकेत देता है। इसलिए इस दिन पूजा के समय पीले या सफेद वस्त्र धारण करने से शुभ ऊर्जा का संचार होता है और मां सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।
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पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी चीजों का अनादर न करें। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
कलम, किताब और वाद्य यंत्रों का अपमान न करें
वसंत पंचमी के दिन सबसे बड़ी भूलों में से एक है पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी चीजों का अनादर करना। शास्त्रों के अनुसार इस दिन कलम, किताब, कॉपी या संगीत से जुड़े वाद्य यंत्रों को पैर लगाना या लापरवाही से फेंकना ‘विद्या दोष’ का कारण बन सकता है। मां सरस्वती ज्ञान और कला की देवी हैं, इसलिए इन वस्तुओं का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। कई स्थानों पर यह परंपरा भी है कि विद्यार्थी इस दिन अपनी पुस्तकों और लेखन सामग्री की पूजा करते हैं और पढ़ाई से एक दिन का विश्राम लेते हैं, ताकि विद्या के प्रति सम्मान और कृतज्ञता भाव बना रहे।
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वसंत पंचमी के दिन बोलचाल में विशेष संयम बरतने की सलाह दी जाती है। - फोटो : adobestock
वाणी पर संयम रखें और भोजन में शुद्धता बनाए रखें
मां सरस्वती को वाणी की देवी भी कहा जाता है, इसलिए वसंत पंचमी के दिन बोलचाल में विशेष संयम बरतने की सलाह दी जाती है। इस दिन किसी से झगड़ा करना, कटु वचन बोलना, झूठ कहना या किसी का अपमान करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि कठोर और गलत शब्दों के प्रयोग से मां सरस्वती अप्रसन्न हो सकती हैं। इसके साथ ही भोजन से जुड़े नियमों का पालन भी जरूरी होता है। इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। सात्विक, हल्का और शुद्ध भोजन ही वसंत पंचमी की पवित्रता और आध्यात्मिक वातावरण को बनाए रखता है, जिससे देवी सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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