श्रीराम के एक हाथ में धनुष बाण है । एक हाथ आशीर्वाद देनेवाला है ।
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श्रीराम तत्त्व का अधिक लाभ होने के लिए क्या कर सकते हैं ?
अध्यात्मशास्त्र की दृष्टि से प्रत्येक देवता एक विशिष्ट तत्त्व है। श्री रामनवमी अथवा देवालय में श्रीराम तत्त्व आकर्षित एवं प्रक्षेपित करने वाली सात्त्विक रंगोलियां बनानी चाहिए। इन रंगोलियों को बनाने से वहां का वायुमंडल श्री रामतत्त्व से प्रभारित होता है, जिसका लाभ सभी को होता है । श्रीराम के एक हाथ में धनुष बाण है । एक हाथ आशीर्वाद देनेवाला है ।
धर्महानि रोकना काल के अनुसार आवश्यक धर्मपालन है।
हम प्रभु श्रीराम की भक्ति किस प्रकार करें ?
आजकल देवताओं का विविध प्रकार से अनादर किया जाता है। व्याख्यान, पुस्तक आदि के माध्यम से देवी-देवताओं पर टीका-टिप्पणी की जाती है; देवताओं की वेशभूषा बनाकर भीख मांगी जाती है, व्यावसायिक विज्ञापनों में देवताओं का ‘मॉडल’के रूप में उपयोग किया जाता है। नाटक-चलचित्रों (फिल्मों) के माध्यम से भी देवताओं का अनादर सार्वजनिक रूप से होता है। देवताओं की उपासना का मूल है श्रद्धा। देवताओं के इस प्रकार के अनादर से श्रद्धा पर गलत प्रभाव पडता है और इससे धर्म की हानि होती है । धर्महानि रोकना काल के अनुसार आवश्यक धर्मपालन है। इसके बिना देवता की उपासना परिपूर्ण हो ही नहीं सकती। अतएव श्री रामभक्त भी इस विषय में जागरुक होकर धर्म हानि रोकें ।
रामराज्य में प्रजा धर्माचरणी थी, इसीलिए उसे श्रीराम जैसा सात्त्विक राज्यकर्ता मिला और आदर्श रामराज्य का उपभोग कर पाए।
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रामनवमी को रामराज्य स्थापना का संकल्प करें !
रामराज्य में प्रजा धर्माचरणी थी, इसीलिए उसे श्रीराम जैसा सात्त्विक राज्यकर्ता मिला और आदर्श रामराज्य का उपभोग कर पाए। उसी प्रकार हम भी धर्माचरणी और ईश्वर का भक्त बनेंगे, तो पहले के समान ही रामराज्य (धर्माधिष्ठित हिन्दु राष्ट्र) अब भी अवतरित होगा !
नित्य धर्माचरण और धर्माधिष्ठित आदर्श राज्यकारभार करने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम अर्थात प्रभु श्रीराम के काल में अपराध, भ्रष्टाचार आदि के लिए कोई स्थान नहीं था ऐसी रामराज्य की ख्याति थी। ऐसा आदर्श राज्य (हिन्दू राष्ट्र) स्थापना का निश्चय करें और धर्महानि रोकें।
सन्दर्भ : सनातन का ग्रन्थ ‘श्रीराम'
कु. कृतिका खत्री,
सनातन संस्था, दिल्ली