फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ramadan 2019: रोजेदारों पर बरसती हैं अल्लाह की रहमतें, एक के बदले मिलती हैं 70 नेकी

Mon, 06 May 2019 08:19 AM IST
कशिश मिश्रा धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 5
ramadan - फोटो : ramadan
इस्लाम धर्म में रमजान माह का खास महत्व होता है। मान्यता है कि इस माह में आसमान से पवित्र किताब कुरान शरीफ को धरती पर लाया गया था। इस महीने को कुरान के जश्न का महीना भी कहा जाता है। इस महीने में लोग खुदा की इबादत के लिए एक महीने का रोजा रखते हैं। जो लोग इस महीने में कुरान पढ़ते है उसका विशेष महत्व होता है। तो वहीं कुछ लोग इस महीने में जरूरतमंदों को दान भी देते है। जिसका फल उन्हें दोगुना मिलता है।
विज्ञापन

2 of 5
ramadan 2019
इस्लाम के जानकार और मोलाना याहया करीमी का कहना है कि रमजान का महीना सब्र व सुकून का है। इस दौरान अल्लाह की खास रहमतें बरसती हैं। अल्लाह ने कुरान शरीफ में कई जगह रोजा रखने को जरूरी बताया है।
विज्ञापन

3 of 5
ramadan
रोजे का इतिहास
अल्लाह के हुक्म से सन 2 हिजरी से मुसलमानों पर रोजे अनिवार्य किए गए। इसका महत्व इसलिए बहुत ज्यादा है क्योंकि रमजान में शब-ए-कद्र के दौरान अल्लाह ने कुरान जैसी नेमत किताब दी। रमजान में जकात (दान) का खास महत्व है। किसी के पास अगर सालभर उसकी जरूरत से ज्यादा साढ़े 52 तोला चांदी या उसके बराबर की नकदी या कीमती सामान है तो उसका ढाई फीसदी जकात यानी दान के रूप में गरीब या जरूरतमंद मुस्लिम को दिया जाना चाहिए।

4 of 5
ramadan
रोजे के मायने
रोजा को अरबी भाषा में सौम कहा जाता है। सौम का मतलब होता है रुकना, ठहरना यानी खुद पर नियंत्रण या काबू करना। यह वो महीना है, जब हम भूख को शिद्दत से महसूस करते हैं और सोचते हैं कि एक गरीब इंसान भूख लगने पर कैसा महसूस करता होगा। बीमार इंसान, जो दौलत होते हुए भी कुछ खा नहीं सकता, उसकी बेबसी को महसूस करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ramadan juma namaz photos - फोटो : rajeev gupta/ amarujala
रमजान के महीने में रोजा रखने पर यह तर्क दिया जाता है कि इस महीना में लोग खुद को बुरी आदतों से दूर रखते हैं। रोजा हमें सिखाता है कि हमें कोई भी गलत काम नहीं करना चाहिए। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें