रमा एकादशी 2020 व्रत और पूजा विधि (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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एकादशी व्रत और पूजा विधि
एकादशी के व्रत ग्याहरवीं तिथि को रखा जाता है, लेकिन उसके नियम दशमी तिथि से ही आरंभ हो जाते हैं। इसलिए दशमी तिथि को सूर्यास्त के बाद भोजन न करें, जिससे एकादशी के दिन पेट में अन्न का अंश न रहे। एकादशी के दिन प्रात:काल स्नानादि करने के पश्चात व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान विष्णु के समक्ष दीप जलाएं धूप दिखाएं, फल फूल नैवेद्द अर्पित करें। विष्णु जी को तुलसी प्रिय हैं, इसलिए उन्हें तुलसी भी अर्पित करें। लेकिन एकादशी को तुलसी न तोड़े। एक दिन पहले तुलसी तोड़ कर रख सकते हैं, तुलसी बासी नहीं होती है। एकादशी को अन्न का सेवन वर्जित है। फलाहार या क्षमतानुसार निर्जला व्रत कर सकते हैं। एकादशी को रात्रि जागरण करके भजन कीर्तन करने का प्रावधान भी है। एकादशी का व्रत द्वादशी तक चलता है। द्वादशी तिथि को प्रातःकाल उठकर विष्णु जी का पूजन करें। उसके बाद शुभ मुहूर्त में किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। फिर स्वयं भी व्रत का पारण करें।