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Rama Ekadashi 2020: कब है रमा एकादशी, जानिए महत्व पूजा विधि और पारण समय

Wed, 28 Oct 2020 04:41 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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रमा एकादशी 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत बहुत महत्व माना गया है। हर माह दो एकादशी आती हैं एक कृष्ण पक्ष में तो दूसरी शुक्ल पक्ष में, इस तरह से पूरे वर्ष में कुल मिलाकर 24 एकादशी के व्रत पड़ते हैं। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी के रमा एकादशी कहते हैं। रमा एकादशी पर मां लक्ष्मी के रमा स्वरुप के साथ विष्णु जी का पूजन किया जाता है। लक्ष्मी जी के नाम पर ही इस एकादशी का नाम रमा एकादशी है। इस एकादशी का व्रत करने से जीवन मेंसुख-समृद्धि बनी रहती है। जानिए कब है एकादशी का व्रत और पूजा की विधि एवं महत्व...
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रमा एकादशी 2020 महत्व(प्रतीकात्मक तस्वीर)
रमा एकादशी महत्व
इस व्रत को करने से मनुष्य के समस्त पापकर्म नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत का उल्लेख पद्म पुराण में भी मिलता है। जिसके अनुसार रमा एकादशी का व्रत करने से कामधेनि और चिंतामणि के समान फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से विष्णु जी के साथ मां लक्ष्मी की कृपा भी मिलती है, जिससे जीवन में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है। 
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रमा एकादशी 2020 तिथि और समय (प्रतीकात्मक तस्वीर)
तिथि और समय
एकादशी तिथि आरंभ-11 नवंबर 2020 सुबह 03:22 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त- 12 नवंबर 2020 रात 12:40 तक
एकादशी व्रत पारण तिथि- 12 नवंबर सुबह 06:42 से 08:51 तक
द्वादशी तिथि समाप्त-रात 09:30 तक
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रमा एकादशी 2020 व्रत और पूजा विधि (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : lord vishnu
एकादशी व्रत और पूजा विधि
एकादशी के व्रत ग्याहरवीं तिथि को रखा जाता है, लेकिन उसके नियम दशमी तिथि से ही आरंभ हो जाते हैं। इसलिए दशमी तिथि को सूर्यास्त के बाद भोजन न करें, जिससे एकादशी के दिन पेट में अन्न का अंश न रहे।  एकादशी के दिन प्रात:काल स्नानादि करने  के पश्चात व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान विष्णु  के समक्ष दीप जलाएं धूप दिखाएं, फल फूल नैवेद्द अर्पित करें। विष्णु जी को तुलसी प्रिय हैं, इसलिए उन्हें तुलसी भी अर्पित करें। लेकिन एकादशी को तुलसी न तोड़े। एक दिन पहले तुलसी तोड़ कर रख सकते हैं, तुलसी बासी नहीं होती है। एकादशी को अन्न का सेवन वर्जित है। फलाहार या क्षमतानुसार निर्जला व्रत कर सकते हैं। एकादशी को रात्रि जागरण करके भजन कीर्तन करने का प्रावधान भी है। एकादशी का व्रत द्वादशी तक चलता है। द्वादशी तिथि को प्रातःकाल उठकर विष्णु जी का पूजन करें। उसके बाद शुभ मुहूर्त में किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। फिर स्वयं भी व्रत का पारण करें।
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