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Ram Navami 2026 Ramayana Quotes: रामनवमी पर रामचरितमानस की चौपाईयों से लें प्रेरणा, आएगा जीवन में शुभ बदलाव

Thu, 26 Mar 2026 06:36 AM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

राम नवमी के पावन अवसर पर यहां श्री राम के जीवन से प्रेरित कुछ महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत हैं। तुलसीदास की रामचरितमानस केवल राम की कहानी मात्र नहीं है, बल्कि यह जीवन के ज्ञान से परिपूर्ण एक ग्रंथ है।
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Ram Navami 2026 - फोटो : अमर उजाला
Ram Navami 2026:  भगवान श्री राम विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं।  भगवान राम ने अपना जीवन एक साधारण मनुष्य की तरह जिया और नैतिकता की सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया। इसी कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम की उपाधि दी गई। राम नवमी के पावन अवसर पर यहां श्री राम के जीवन से प्रेरित कुछ महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत हैं। तुलसीदास की रामचरितमानस  केवल राम की कहानी मात्र नहीं है, बल्कि यह जीवन के ज्ञान से परिपूर्ण एक ग्रंथ है। इसमें अनेक ऐसी चौपाइयां हैं जो हमें प्रेरित करती हैं और जीवन को सरल तथा सुंदर बनाने के लिए हमारा मार्गदर्शन करती हैं। आइए, जानते हैं इन महत्वपूर्ण चौपाइयों के बारे में। 
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Ram Navami 2026 - फोटो : Adobe
होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥

जो कुछ राम ने रच रखा है, वही होगा। तर्क करके कौन शाखा (विस्तार) बढ़ावे। यानि भविष्य के बारे में सोचकर क्यों बात को विस्तार देना। ऐसा कहकर शिवजी भगवान्श्री हरि का नाम जपने लगे और सतीजी वहाँ गईं, जहाँ सुख के धाम प्रभु श्री रामचंद्रजी थे। 

 
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Ram Navami 2026 - फोटो : adobe stock
लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानु॥
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर नीति॥

 
श्री राम कहते हैं, मूर्ख लोगों से विनम्रता से बात करने का कोई लाभ नहीं होता। कभी-कभी ऐसे लोगों से काम करवाने के लिए सख्ती बरतना आवश्यक हो जाता है। इसी प्रकार, कपटी स्वभाव वाले लोगों के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करना उचित नहीं है, क्योंकि वे सदैव दूसरों के लिए मुसीबत खड़ी करते हैं और उन पर भरोसा करना खतरनाक होता है। ठीक इसी तरह, कंजूस लोगों पर अच्छे नैतिक मूल्यों, उदारता अथवा उपदेशों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए, उनसे किसी प्रकार की सहायता या दान की अपेक्षा करना व्यर्थ है। 

 

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Ram Navami 2026 - फोटो : adobe stock
ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी॥
क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा॥

अत्यधिक मोह से ग्रस्त व्यक्ति को ज्ञान की बातें समझाना व्यर्थ है, क्योंकि वह सत्य और असत्य के बीच के अंतर को ठीक से समझ पाने में असमर्थ होता है। इसी प्रकार, अत्यधिक लालची व्यक्ति को त्याग या वैराग्य का महत्व समझाना भी निरर्थक है। जो व्यक्ति सदैव क्रोधित रहता है, उसे शांति की बातें समझाना भी किसी काम का नहीं है। ठीक इसी तरह, कामवासना से भरे व्यक्ति से ईश्वर के विषय में बात करना भी व्यर्थ है, क्योंकि उसका मन उन विचारों को ग्रहण करने के लिए तैयार नहीं होता।
 
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Ram Navami 2026 - फोटो : adobe stock
काम, क्रोध, मद, लोभ, सब, नाथ नरक के पंथ।
सब परिहरि रघुबीरहि, भजहुँ भजहिं जेहि संत।
विभीषण रावण को पाप के मार्ग पर आगे बढ़ने से रोकने की सलाह देते हैं। वे समझाते हैं कि काम, क्रोध, अहंकार और लोभ जैसे दुर्गुण नरक की ओर ले जाते हैं। इसी प्रकार, वे सलाह देते हैं कि जिस तरह संतजन सब कुछ त्यागकर प्रभु के नाम का जाप करते हैं, उसी तरह तुम्हें भी श्रीराम की शरण में चले जाना चाहिए। क्योंकि श्रीराम का नाम ही वह शक्ति है जो जीवन की रक्षा करती है और मुक्ति की ओर ले जाती है। 
 
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Ram Navami 2026 - फोटो : अमर उजाला
जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी॥
निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक दुख रज मेरु समाना॥

जो लोग मित्र के दुःख से दुःखी नहीं होते, उन्हें देखने से ही बड़ा पाप लगता है। अपने पर्वत के समान दुःख को धूल के समान और मित्र के धूल के समान दुःख को सुमेरु (बड़े भारी पर्वत) के समान जाने। 
 

 
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Ram Navami 2026 - फोटो : amar ujala
मोह सकल ब्याधिन्ह कर मूला। तिन्ह ते पुनि उपजहिं बहु सूला॥
काम बात कफ लोभ अपारा। क्रोध पित्त नित छाती जारा॥
सब रोगों की जड़ मोह (अज्ञान) है। उन व्याधियों से फिर और बहुत से शूल उत्पन्न होते हैं। काम वात है, लोभ अपार (बढ़ा हुआ) कफ है और क्रोध पित्त है जो सदा छाती जलाता रहता है। 

 
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Ram Navami 2026 - फोटो : अमर उजाला
सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहुँ मुनिनाथ।
हानि, लाभ, जीवन, मरण,यश, अपयश विधि हाँथ।

हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, ये सब विधाता के हाथ हैं॥ भले ही लाभ-हानि जीवन-मरण ईश्वर के हाथ में हो, लेकिन हानि के बाद हम हार मानकर बैठें नहीं। ये हमारे ही हाथ हैं। 



 
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