फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ram Navami 2021: इन मंदिरों का है भगवान राम से सीधा संबंध, जानिए इनके बारे में

Tue, 20 Apr 2021 09:01 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 8
राम नवमी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस बार 21 अप्रैल 2021 दिन बुधवार को पूरे देश में रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। जगत पालन कर्ता भगवान विष्णु ने राम और माता लक्ष्मी ने सीता मां के रूप में संसार के कल्याण के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था। आज भी रामायण कालीन कई ऐसे स्थान हैं, जिनका सीधा संबंध प्रभु श्री राम से है। भगवान राम के जन्मोत्सव के पावन पर्व पर जानते हैं इन स्थानों और उससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में।
 
विज्ञापन

2 of 8
राम मंदिर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : self
इस बात से तो सभी अवगत हैं कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। भगवान राम का जन्म अयोध्या के दक्षिणी भाग रामकोट में हुआ था। वर्तमान समय में यह स्थान उत्तर प्रदेश में स्थित है, जहां एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद भगवान राम के जन्म स्थान पर राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसी तरह से रामायणकालीन कई ऐसे स्थान हैं जिनका संबंध सीधे प्रभु श्री राम के साथ है।
विज्ञापन

3 of 8
जनकपुरी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
जनकपुर नेपाल
जनकपुर माता सीता का जन्म स्थान है। वर्तमान समय में यह स्थान नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित है और भगवान राम की ससुराल के रूप में विख्यात है। रामायण काल में यह स्थान मिथिला की राजधानी था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहीं पर माता सीता और भगवान राम का विवाह हुआ था। आज भी जनकपुर में भक्त विवाह स्थल और विवाह मंडप के दर्शन करने आते हैं। जनकपुर के पास रहने वाले लोग विवाह के अवसर पर जनकपुर मंदिर से सिंदूर लेकर जाते हैं जिसे दुल्हन की मांग में भरा जाता है। मान्यता है कि इससे वर वधू को प्रभु श्री राम और माता सीता का आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे उनका संबंध मजबूत बना रहता है।

4 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
यहां भगवान राम ने किया अहिल्या का उद्धार
बिहार के दरभंगा जिले में स्थित अहियारी गांव अहिल्या स्थान के नाम से प्रसिद्ध है। यहां पर अहिल्या स्थान में एक मंदिर बना हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी स्थान पर भगवान राम ने ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या का उद्धार किया था और उन्हें पाषाण की प्रतिमा से पुनः नारी रूप प्राप्त हुआ। रामनवमी के मौके पर यहां एक अलग ही परंपरा देखने को मिलती है। लोग सुबह-सुबह यहां पर बैंगन का भार लेकर पहुंचते हैं। फिर भगवान राम और माता अहिल्या को बैंगन का भरता अर्पित करते हैं। मंदिर के प्रांगण में प्रभु राम, माता सीता और लक्ष्मण जी का मंदिर भी बना हुआ है। इस मंदिर के बारे में कथा मिलती है कि जब अहिल्या माता के मंदिर का निर्माण किया जा रहा था तब माता अहिल्या राजा छत्र सिंह के स्वप्न में आई और कहा कि जिन्होंने मेरा उद्धार किया है उनके मंदिर का भी निर्माण करवाया जाए। उसी के बाद मंदिर प्रांगण में राम जी के साथ सीता माता और लक्ष्मण जी के मंदिर का निर्माण कराया गया। इसी मंदिर के पास भोजपुर नामक स्थान है, कहा जाता है कि यह वही स्थान है जहां भगवान राम ने ताड़का का वध किया था। 
विज्ञापन

5 of 8
भगवान राम और उनके भाई भरत (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
यहां मौजूद हैं माता सीता और भगवान राम के पदचिन्ह
कैकयी के वरदान मांगने पर भगवान राम को चौदह वर्षों का वनवास मिला जब वे चौदह साल के वनवास में थे, तब लगभग 11 साल उन्होंने चित्रकूट ही बिताए थे। वर्तमान समय में यह स्थान उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच में स्थित है। जब राजा दशरथ की मृत्यु हुई थी तब राम जी को वापस लेकर जाने के लिए भरत जी इसी स्थान पर उनसे मिले थे। आज भी चित्रकूट में राम और माता सीता के कई पद चिन्ह मौजूद हैं और कई स्थानों पर उनके मंदिर बने हुए हैं। यहां पर जानकी कुंड भी बना हुआ है जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां माता सीता स्नान करती थी। यही पर एक शिला है जिसपर माता सीता के पदचिन्ह बने हुए हैं।चित्रकूट से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर माता अनुसूया और महर्षि अत्रि का आश्रम भी है।
 
विज्ञापन

6 of 8
भगवान राम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
इस स्थान पर रूके थे प्रभु श्री राम
आंध्र प्रदेश के खम्मण जिले के भद्राचलम शहर में भगवान राम और माता सीता के मंदिर का संबंध भी रामायण काल से है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब माता सीता को बचाने के लिए भगवान राम लंका जा रहे थे तब गोदावरी नदी को पार करने के पश्चात वे यहीं पर रूके थे। यहां से कुछ किलोमीटर की दूरी पर पर्णशाला नामक स्थान है। कथाओं के अनुसार प्रभु श्री राम यहीं पर पर्णकुटी बनाकर रहे थे। यहां पर एक शिलाखंड भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि सीताजी ने वनवास के दौरान यहां पर वस्त्र सुखाए थे। 
विज्ञापन

7 of 8
Ram Setu - फोटो : Social Media
जहां हुआ रामसेतु का निर्माण
माता सीता को वापस लाने के लिए हनुमान जी की सेना ने जिस स्थान पर लंका पहुंचने के लिए राम सेतु का निर्माण किया था वह स्थान रामेश्वरम के नाम से जाना जाता है। इसी स्थान पर एक विशाल मंदिर बना हुआ है जहां राम जी ने माता सीता की वापसी के लिए शिव जी की आराधना की थी। वर्तमान समय में यह स्थान (रामेश्वरम) दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित है और हिंदू धर्म का एक प्रमुख स्थल है। रामसेतु को दुनिया भर में एडम्स ब्रिज के नाम से जाना जाता है। यह पुल लगभग 30 मील (48 किमी) लंबा है। 
विज्ञापन

8 of 8
लक्ष्मण सूर्पणखा
राम जी और लक्ष्मण जी ने यहां स्वयं लगाए थे वृक्ष
त्रेतायुग में वनवास के दौरान भगवान राम, सीता जी और लक्ष्मण जी ने कुछ समय पंचवटी बिताया था। गोदावरी के तट से लगभग आधा मील दूर पांच वट वृक्ष लगे हैं। कहां जाता है कि ये वृक्ष स्वयं भगवान राम और लक्ष्मण जी ने लगाए थे। यही पर एक गुफा है जिसे सीता गुफा कहा जाता है इसमें सीढ़ियों से नीचे उतर कर जाने पर माता सीता, राम जी और लक्ष्मण जी की छोटी छोटी प्रतिमाएं हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार यही वह स्थान है जहां पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी। वर्तमान समय में यह स्थान पंचवटी नासिक में स्थित है।
 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें