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Ram Mandir: भगवान राम के जीवन से सीखनी चाहिए ये चार बातें

Wed, 05 Aug 2020 06:36 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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राम मंदिर - फोटो : amar ujala
जन्मभूमि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनने जा रहा है। 5 अगस्त को मंदिर का भूमि पूजन होगा। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का प्रस्तावित मंदिर करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का बड़ा केन्द्र बनेगा। पहले से ही सरयू नदी के तट पर बसी अयोध्यानगरी के प्रति हिन्दू धर्म के अनुयायियों की अगाध श्रद्धा है। 

भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा के दायरे में रहकर कर्तव्यों का पालन करने की सीख देता है। वचनबद्धता और कर्तव्यनिष्ठा उनके जीवन के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। उनके जीवन से हमें कई चीजों की प्रेरणा लेने की जरूरत है। आइए जानते हैं उनके जीवन से हम क्या-क्या चीजें सीख सकते हैं। 
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नया लोगो। - फोटो : amar ujala
चरित्र और आचरण
रामायण में भगवान श्रीराम को भगवान विष्णु का अवतार बताया गया है जो स्वंय भगवान के गुणों से ओतप्रोत है। आज समाज के लोगों के आचरण में जो मिलावट आई है ऐसे में भगवान राम के आचरण से हमें पवित्रता की सीख लेनी चाहिए। 
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भगवान राम और उनके भाई भरत (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
माता-पिता के लिए सम्मान
पिता दशरथ और माता कैकेयी के द्वारा 14 वर्ष का वनवास दिए जाने पर श्री राम ने माता-पिता की आज्ञा का पालन किया। साथ ही भगवान राम को पता था कि मेरे पिता वचन के आगे मजबूर हैं इसलिए उन्हें उनकी आज्ञा का पालन करना ही होगा इसलिए राम ने वनवास का रास्ता चुन लिया।

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भगवान राम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
गुरु के प्रति आदर
गुरु का स्थान किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे बड़ा होता है। गुरू के ज्ञान से ही हम जीवन में सफलता प्राप्त कर पाते हैं परन्तु आज का युवा गुरू की आज्ञा का पालन नही करता है और बिना मार्गदर्शन के गलत राह पर चलने लगता है। भगवान श्री राम जी ने हमेशा अपने गुरु वशिष्ट की आज्ञा का पालन किया है। हमें उनके चरित्र से गुरू भक्ति सीखनी चाहिए।
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lord rama
धैर्यशाली व्यक्तित्व
किसी भी मुश्किल परिस्थिति में भगवान राम ने अपना धैर्य नहीं खोया है। उन्होनें हर परेशानी में धैर्य से काम लिया है इसलिए हमें भगवान राम जी तरह जीवन की हर तकलीफ में शांति से कार्य करना चाहिए।
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lord rama
जो किस्मत में लिखा है उसको अपनाना
भगवान श्री राम जी ने कभी भी नियति को बदलने की कोशिश नही की,जो नियति में लिखा हुआ है हमें वह स्वीकार करना चाहिए क्योंकि नियति से कोई भी नही लड़ सकता है।
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