वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूर्णिमा का महत्व
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूर्णिमा का महत्व
पूर्णिमा का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझा जा सकता है। चंद्रमा का सीधा संबंध जल तत्व से होता है। जैसे समुद्र में पूर्णिमा के दिन ज्वार-भाटा आता है, वैसे ही मानव शरीर, जिसमें अधिकांश भाग जल का होता है, उस पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इस दिन व्यक्ति अधिक भावुक, संवेदनशील या बेचैन महसूस कर सकता है। कई लोगों को नींद में कमी या मन की चंचलता भी अनुभव होती है।
इसी कारण विशेषज्ञ इस दिन संयम और सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं। व्रत रखने से शरीर को संतुलन मिलता है और मन शांत रहता है। विशेष रूप से जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं, उनके लिए इस दिन हल्का और सात्विक भोजन करना लाभकारी माना जाता है।