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Poornima Tithi: पूर्णिमा पर क्यों बढ़ जाती है सकारात्मक ऊर्जा? जानिए इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

Thu, 02 Apr 2026 11:11 AM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Poornima Tithi Significance: जब चंद्रमा अपनी पूर्ण अवस्था में दिखाई देता है, उसे पूर्णिमा या पूरनमासी कहा जाता है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस तिथि को इतना खास क्यों माना जाता है और इसका महत्व क्या है...
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क्यों पवित्र मानी जाती है पूर्णिमा? - फोटो : Amar Ujala
Importance Of Poornima Tithi: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। हर महीने आने वाली यह तिथि चंद्रमा की पूर्ण अवस्था को दर्शाती है, जब वह अपनी सभी कलाओं के साथ आकाश में दिखाई देता है। माना जाता है कि इस दिन वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, जिसका प्रभाव मन और शरीर दोनों पर पड़ता है। पूर्णिमा के दिन स्नान, दान, जप, तप और पूजा-पाठ का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 

इस दिन लोग सत्यनारायण व्रत कथा का श्रवण करते हैं, गीता का पाठ करते हैं और विष्णु सहस्त्रनाम का जाप भी करते हैं। साथ ही “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जप करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस दिन को इतना खास क्यों माना जाता है और इसका महत्व क्या है...

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूर्णिमा का महत्व - फोटो : Adobe
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूर्णिमा का महत्व
पूर्णिमा का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझा जा सकता है। चंद्रमा का सीधा संबंध जल तत्व से होता है। जैसे समुद्र में पूर्णिमा के दिन ज्वार-भाटा आता है, वैसे ही मानव शरीर, जिसमें अधिकांश भाग जल का होता है, उस पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इस दिन व्यक्ति अधिक भावुक, संवेदनशील या बेचैन महसूस कर सकता है। कई लोगों को नींद में कमी या मन की चंचलता भी अनुभव होती है।

इसी कारण विशेषज्ञ इस दिन संयम और सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं। व्रत रखने से शरीर को संतुलन मिलता है और मन शांत रहता है। विशेष रूप से जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं, उनके लिए इस दिन हल्का और सात्विक भोजन करना लाभकारी माना जाता है।
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पूर्णिमा के दिन क्या नहीं करना चाहिए? - फोटो : Adobe Stock
पूर्णिमा के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
  • पूर्णिमा के दिन कुछ कार्यों से बचना भी जरूरी माना गया है। 
  • इस दिन तामसिक भोजन, शराब और किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए। 
  • साथ ही झूठ बोलना, धोखा देना, चोरी करना या किसी की निंदा करना भी अशुभ माना जाता है। 
  • इन नियमों का पालन करने से व्यक्ति मानसिक और आध्यात्मिक रूप से शुद्ध बना रहता है।

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पूर्णिमा पर दीपक जलाने का महत्व - फोटो : Freepik
पूर्णिमा पर दीपक जलाने का महत्व
पूर्णिमा की शाम को खुले आसमान के नीचे दीप जलाने की परंपरा भी प्रचलित है, जिसे ‘आकाशदीप’ कहा जाता है। इसे भगवान विष्णु को समर्पित किया जाता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान विशेष मंत्रों का उच्चारण करते हुए दीप अर्पित करने से आध्यात्मिक लाभ मिलता है और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
 
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क्यों पवित्र मानी जाती है पूर्णिमा? - फोटो : Freepik
पूर्णिमा का दिन आत्मशुद्धि, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। यह दिन व्यक्ति को अपने जीवन में संतुलन लाने और आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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