सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही तीर्थों के राजा प्रयागराज में जैसे ही 13 अखाड़ों का शाही स्नान प्रारंभ हुआ, वैसे ही औपचारिक रूप से कुंभ मेले की भव्य शुरुआत हो गई। आस्था के इस महामेले में साधु-संतों के साथ देश-विदेश से बड़ी संख्या श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रयागराज कुंभ मेले के दर्शन के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
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संगम तट पर शाही स्नान के लिए सबसे पहले पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ने दस्तक दी। इसके बाद अन्य अखाड़ों के साधु-संत एवं नागा साधुओं ने अपने आचार्य महामंडलेश्वर के साथ स्नान किया।
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कुंभ के शाही स्नान में शैव, वैष्णव और उदासीन परंपरा के साधुओं ने हिस्सा लिया।
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हमेशा की भांति शाही स्नान के लिए जाते हुए नागा साधुओं का कारवां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
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प्रयाग कुंभ मेले में पहली बार पहुंचे किन्नर अखाड़े ने जूना अखाड़े के संग स्नान किया। इस मौके पर किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अपने तमाम किन्नर साधकों के साथ संगम तट पर देवत्व यात्रा के लिए निकला।
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कुंभ के पावन पर्व पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए संगम तट पर श्रद्धालुओं जमघट लगा हुआ है।
पवित्र घड़ी में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम तट पर मोक्ष की कामना से डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु सुविधा-असुविधा की परवाह किए बगैर देर रात से ही मेला क्षेत्र में जुटने लगे थे।