सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। सप्ताह के जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है, उसी के आधार पर प्रदोष व्रत का नाम रखा जाता है। अक्तूबर 2026 में पहला प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। शिव पूजा के लिए सूर्यास्त के आसपास का समय विशेष माना गया है। आइए जानते हैं अक्तूबर के पहले प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।