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अक्तूबर का पहला प्रदोष व्रत कब? जानें त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल का शुभ समय

Tue, 29 Sep 2026 10:53 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

अक्तूबर 2026 में पहला प्रदोष व्रत 8 अक्तूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है। आइए जानते हैं प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।
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शिव पूजा के लिए सूर्यास्त के आसपास का समय विशेष माना गया है। - फोटो : amar ujala

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। सप्ताह के जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है, उसी के आधार पर प्रदोष व्रत का नाम रखा जाता है। अक्तूबर 2026 में पहला प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। शिव पूजा के लिए सूर्यास्त के आसपास का समय विशेष माना गया है। आइए जानते हैं अक्तूबर के पहले प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।

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कब है गुरु प्रदोष व्रत? - फोटो : freepik.com

अक्तूबर में गुरु प्रदोष व्रत कब है?
पंचांग के अनुसार, अक्तूबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत 8 अक्तूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन त्रयोदशी तिथि का संयोग गुरुवार के साथ बन रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है।
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 7 अक्तूबर 2026 को रात 11:16 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 8 अक्तूबर 2026 को रात 10:15 बजे
प्रदोष व्रत में उदया तिथि के साथ-साथ प्रदोष काल में पड़ने वाली त्रयोदशी का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए शिव पूजा के लिए प्रदोष काल का समय महत्वपूर्ण रहेगा।

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कब है गुरु प्रदोष व्रत? - फोटो : freepik.com

गुरु प्रदोष व्रत का शुभ पूजा मुहूर्त
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करने की परंपरा है। अक्तूबर 2026 में गुरु प्रदोष व्रत के दिन पूजा के लिए शुभ समय इस प्रकार रहेगा:
प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक
पूजा की अवधि: लगभग 2 घंटे 28 मिनट

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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock

प्रदोष व्रत पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?

  • प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  • इसके बाद पूरे दिन भगवान शिव का ध्यान और मंत्र जाप किया जा सकता है।
  • शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का जल या दूध से अभिषेक करके बेलपत्र, फूल और फल अर्पित किए जाते हैं।
  • पूजा के दौरान माता पार्वती की भी आराधना की जाती है।
  • इसके बाद भगवान शिव की आरती कर प्रसाद अर्पित किया जाता है।
  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान देना भी शुभ माना जाता है।
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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत पर इन शिव मंत्रों का करें जाप
  • ॐ नमः शिवाय
  • ॐ पार्वतीपतये नमः
  • ॐ नीलकण्ठाय नमः
  • श्री शिवाय नमः
  • श्री शंकराय नमः
  • श्री महेश्वराय नमः
  • श्री रुद्राय नमः
  • श्री सांबसदाशिवाय नमः
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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock

गुरु प्रदोष व्रत का क्या है धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने वाला व्रत बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और प्रदोष काल में शिव पूजा करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। इसी वजह से गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष को गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दिन शिव आराधना के साथ गुरु तत्व से जुड़े शुभ फल की कामना भी की जाती है। कई श्रद्धालु गुरु प्रदोष व्रत सुख-समृद्धि, पारिवारिक खुशहाली और मनोकामना पूर्ति की कामना से रखते हैं। विवाहित लोग दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना से और अविवाहित लोग अच्छे जीवनसाथी की कामना से भी यह व्रत करते हैं। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनके परिणामों को आस्था के संदर्भ में ही देखा जाता है।

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कब है गुरु प्रदोष व्रत? - फोटो : freepik.com

शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?

  • प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, फूल और फल अर्पित करने की परंपरा है।
  • पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप किया जा सकता है।
  • शिवलिंग पर सामग्री अर्पित करते समय श्रद्धा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
  • भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष माना गया है। 
  • इस दौरान विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने की धार्मिक परंपरा है।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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