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Pradosh Vrat 2021 : इस बार शनि प्रदोष व्रत पर बन रहा है ध्रुव योग, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Mon, 19 Apr 2021 03:28 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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pradosh vrat
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस तरह से एक माह में दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं। एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में आता है। प्रदोष व्रत का नाम और फल वार के अनुसार होता है। इस बार का प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ रहा है इसलिए यह शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस बार चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रदोष प्रदोष व्रत 24 अप्रैल 2021 को किया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख समृद्धि आती है। इस बार त्रयोदशी तिथि पर ध्रुव योग भी बन रहा है इसलिए प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाएगा। आइए जानते हैं महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
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प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
शनि प्रदोष व्रत तिथि शुभ मुहूर्त-
चैत्र शुक्ल त्रयोदशी तिथि आरंभ- 24 अप्रैल 2021 दिन शनिवार की शाम 7 बजकर 17 मिनट से 
 
चैत्र शुक्ल त्रयोदशी तिथि समाप्त- 25 अप्रैल 2021 दिन रविवार शाम 04 बजकर 12 मिनट पर
 
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल यानि सूर्यास्त के समय की जाती है इसलिए प्रदोष व्रत 24 को किया जाएगा।

पूजा का समय 24 अप्रैल शाम 07 बजकर 17 मिनट से रात 09 बजकर 03 मिनट तक रहेगा।
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प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रदोष का व्रत महत्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व माना गया है। इस दिन व्रत और पूजन करने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है। भक्तों के जीवन से कष्टों का निवारण होता है। शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को करने से शनि के कष्टों से मुक्ति मिलती है। साढ़े साती और ढैय्या में लाभ प्राप्त होता है। मान्यता है कि शनि प्रदोष व्रत के दिन पूजा- पाठ करने से निसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है।

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प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
शनि प्रदोष व्रत पर ध्रुव योग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार प्रदोष व्रत वाले दिन ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है। ध्रुव योग 23 अप्रैल 2021 को दोपहर 02 बजकर 39 से लेकर 24 अप्रैल सुबह 11 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। सूर्य इस समय मेष राशि में रहेेगा। चंद्रमा सिंह में होगा और फिर कन्या राशि में गोचर करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस योग में इमारत, भवन आदि का काम कराना शुभ होता है, लेकिन इस योग में वाहन नहीं खरीदना चाहिए।
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प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रदोष व्रत पूजा विधि-
  • प्रदोष व्रत निर्जला किया जाता है। अपनी क्षमतानुसार फलहारी व्रत भी किया जा सकता है। 
  • त्रयोदशी तिथि को प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद पूजा स्थान पर धूप दीप प्रज्जवलित करें और पूरे दिन व्रत रखें।
  • शाम के समय सूर्यास्त से पौन घंटा यानि 45 मिनट पहले एक स्थान को स्वच्छ करके पूजा आरंभ करें।
  • भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें और फिर गंगाजल से स्नान कराएं।
  • इस बात का ध्यान रखें कि शिव जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग न करें।
  • पूजा पूर्ण होने के बाद वहीं आसन पर बैठकर शिव चालीसा या शिव मंत्रों का जाप करें।
मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और भगवान शिव की विधि विधान से पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।
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