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अक्तूबर में दो प्रदोष व्रत का संयोग, जानें 8 को गुरु और 23 को शुक्र प्रदोष का शुभ मुहूर्त

Thu, 01 Oct 2026 01:55 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

अक्टूबर 2026 में भगवान शिव की आराधना के लिए दो प्रदोष व्रत पड़ेंगे। 8 अक्टूबर को गुरु प्रदोष व्रत और 23 अक्टूबर को शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाएगा। जानें दोनों व्रतों की तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।
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अक्तूबर प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala

हिंदू पंचांग में त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना गया है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में शिव आराधना करने से भक्तों को सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ अपनी परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करने का अवसर मिलता है। अश्विन मास के दौरान अक्तूबर 2026 में भी दो प्रदोष व्रत पड़ने वाले हैं। इनमें पहला व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर और दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर रखा जाएगा। खास बात यह है कि पहला प्रदोष गुरुवार और दूसरा शुक्रवार को पड़ रहा है, इसलिए इन्हें गुरु प्रदोष और शुक्र प्रदोष कहा जाएगा। आइए जानते हैं दोनों प्रदोष व्रत की सही तारीख, तिथि और पूजा का शुभ समय।

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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala

8 अक्तूबर को गुरु प्रदोष व्रत
अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्तूबर 2026 को रात 11 बजकर 16 मिनट से शुरू होगी और 8 अक्तूबर की रात 11 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार इस बार कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 8 अक्तूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। गुरुवार के दिन आने वाले प्रदोष को गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ बृहस्पति देव का स्मरण भी किया जाता है। मान्यता है कि गुरु प्रदोष का व्रत शिक्षा, ज्ञान, धर्म और आर्थिक समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।

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गुरु प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त - फोटो : freepik.com

गुरु प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त
8 अक्तूबर को भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शिवलिंग का अभिषेक, बेलपत्र अर्पित करने और भगवान शिव की विधिवत पूजा करने की परंपरा है।

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शुक्र प्रदोष - फोटो : amar ujala

23 अक्तूबर को शुक्र प्रदोष व्रत
अक्तूबर का दूसरा प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 23 अक्तूबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट से शुरू होगी और 24 अक्तूबर को दोपहर 1 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर प्रदोष व्रत 23 अक्तूबर 2026, शुक्रवार को ही रखा जाएगा। शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष को शुक्र प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत वैवाहिक सुख, प्रेम, सौंदर्य, भौतिक सुख-सुविधाओं और समृद्धि की कामना से जुड़ा माना जाता है। विशेष रूप से गृहस्थ जीवन से जुड़े लोगों के लिए इस व्रत को महत्वपूर्ण माना जाता है।

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शुक्र प्रदोष पूजा का शुभ समय - फोटो : freepik

शुक्र प्रदोष पूजा का शुभ समय
23 अक्तूबर 2026 को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 44 मिनट से रात 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जा सकती है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का ध्यान कर सकते हैं।

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गुरु और शुक्र प्रदोष में क्या अंतर है? - फोटो : adobe stock

गुरु और शुक्र प्रदोष में क्या अंतर है?
अक्तूबर में पड़ने वाले दोनों प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित हैं, लेकिन सप्ताह के अलग-अलग दिनों में आने के कारण इनके नाम और उनसे जुड़ी मान्यताएं अलग हैं। 8 अक्तूबर का गुरु प्रदोष ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और समृद्धि से जोड़ा जाता है, जबकि 23 अक्तूबर का शुक्र प्रदोष वैवाहिक सुख, प्रेम और भौतिक समृद्धि की कामना से संबंधित माना जाता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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