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Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत पर इस विधि से करें शिवलिंग का अभिषेक, हर मनोकामना होगी पूर्ण

Tue, 14 Apr 2026 01:42 PM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Pradosh Vrat Shivling Abhishek Vidhi: माना जाता है कि प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करने से इच्छाएं पूरी होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। आइए जानते हैं कि शिवलिंग के अभिषेक की सही विधि क्या है।
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प्रदोष व्रत - फोटो : Amar Ujala
Shivling Abhishek Vidhi: हिंदू पंचांग में कुछ दिन ऐसे माने गए हैं, जब की गई छोटी सी साधना भी जीवन में बड़े बदलाव ला सकती है, प्रदोष व्रत उन्हीं में से एक है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस समय शिव और शक्ति का विशेष आशीर्वाद भक्तों पर बरसता है। हर महीने त्रयोदशी तिथि पर आने वाला यह व्रत न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि जीवन में चल रही परेशानियों, आर्थिक तंगी और रोगों को दूर करने में भी सहायक माना जाता है। खासतौर पर प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करने से इच्छाएं पूरी होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

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प्रदोष व्रत 2026 तिथि और शुभ समय - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत 2026 तिथि और शुभ समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल को रात 12:12 बजे प्रारंभ होगी और उसी दिन रात 10:31 बजे समाप्त होगी। ऐसे में प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को रखा जाएगा। 

इस दिन प्रदोष काल शाम 6:47 बजे से रात 9:00 बजे तक रहेगा, जो पूजा-अर्चना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है।
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शिवलिंग अभिषेक की विधि - फोटो : adobe stock
शिवलिंग अभिषेक की विधि
इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। शाम के समय आप मंदिर जाकर या घर पर ही शिवलिंग की स्थापना कर विधिवत पूजा कर सकते हैं।
 
  • सबसे पहले शिवलिंग को साफ जल और गंगाजल से स्नान कराएं।
  • आर्थिक परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए कच्चे दूध और शहद से अभिषेक करना लाभकारी माना जाता है।
  • यदि जीवन में शत्रुओं का भय या कर्ज की समस्या हो, तो गन्ने के रस से अभिषेक करें।
  • इसके बाद शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं और भस्म, धतूरा व आक के फूल अर्पित करें।
  • बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि उसका चिकना भाग शिवलिंग को स्पर्श करे और वह कटा-फटा न हो।
  • प्रदोष काल में घी का दीपक जलाकर शिवलिंग के पास रखें और श्रद्धा के साथ पूजा करें।
  • अंत में ‘शिव चालीसा’ या ‘रुद्राष्टकम’ का पाठ करें और आरती कर पूजा पूर्ण करें।

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इन गलतियों से करें परहेज - फोटो : adobe stock
इन गलतियों से करें परहेज
केतकी का फूल: मान्यता है कि भगवान शिव ने इस फूल को श्राप दिया था, इसलिए इसे अर्पित नहीं करना चाहिए।
टूटे हुए चावल: पूजा में हमेशा साबुत अक्षत ही चढ़ाएं, क्योंकि टूटे चावल अपूर्णता का संकेत माने जाते हैं।
 
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मंत्र जाप - फोटो : amar ujala
मंत्र
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है,

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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