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Pradosh Vrat 2025: 9 या 10 अप्रैल, कब रखा जाएगा पहला गुरु प्रदोष व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Tue, 08 Apr 2025 01:43 PM IST
दीक्षा पाठक धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चैत्र माह की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाला गुरु प्रदोष व्रत इस वर्ष अप्रैल 2025, गुरुवार को आ रहा है और वो भी एक अत्यंत शुभ योग के साथ। तो आज की इस खबर में हम आपको बताएंगे कि इस बार 9 अप्रैल या 10 अप्रैल, कब है प्रदोष व्रत। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है। शिव पुराण में भी इस व्रत की महिमा का विस्तृत उल्लेख मिलता है। विशेषकर महिलाएं भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने हेतु इस व्रत का पालन करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से व्यापार और करियर में सफलता प्राप्त होती है। इस व्रत को करने वाली महिलाओं के जीवन में कभी किसी प्रकार की कमी नहीं रहती। साथ ही अविवाहित कन्याओं की विवाह संबंधी बाधाएं भी दूर हो जाती हैं। इस बार अप्रैल का महीना शिवभक्तों के लिए बेहद खास और विशेष है। चैत्र माह की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाला गुरु प्रदोष व्रत इस वर्ष अप्रैल 2025, गुरुवार को आ रहा है और वो भी एक अत्यंत शुभ योग के साथ। तो आज की इस खबर में हम आपको बताएंगे कि इस बार 9 अप्रैल या 10 अप्रैल, कब है प्रदोष व्रत। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
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कब है गुरु प्रदोष व्रत? - फोटो : freepik.com
इस दिन किया जाएगा प्रदोष का व्रत
आपको बता दें कि इस बार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 9 अप्रैल की रात 10:55 बजे से हो रही है और यह 11 अप्रैल की रात 1:00 बजे तक जारी रहेगी। लेकिन व्रत का निर्धारण उदया तिथि के अनुसार होता है, इसलिए यह पुण्य व्रत 10 अप्रैल को ही रखा जाएगा। यानी की इस बार प्रदोष का व्रत 10 अप्रैल को ही किया जाएगा।
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कब है गुरु प्रदोष व्रत? - फोटो : freepik.com
यह है शिव पूजा का शुभ मुहूर्त
जो भक्त महादेव की पूजा प्रदोष काल में करते हैं, उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस बार प्रदोष काल शाम 6:44 बजे से रात 8:59 बजे तक रहेगा। यही वह समय है जब शिव शंकर अपने भक्तों की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें कृपा का आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में आप पूजन सामग्री की पहले से ही तैयारी कर लें और सही विधि अनुसार ही पूजा करें।

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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock
क्या है गुरु प्रदोष व्रत
जब प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ता है तो उसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह दिन गुरु बृहस्पति और भगवान शिव दोनों की कृपा पाने का द्वार खोलता है। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस दिन विधि पूर्वक उपवास, ध्यान और शिवपूजन करने से जीवन के दोष समाप्त होते हैं और शुभता का भी वास होता है।
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कब है गुरु प्रदोष व्रत? - फोटो : freepik.com
ऐसे करें पूजा
गुरु प्रदोष व्रत में शिवलिंग पर जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करना, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करना विशेष फलदायक माना गया है। साथ ही, प्रदोष व्रत कथा का श्रवण कर व्रत को पूर्ण किया जाता है। माना जाता है कि यह व्रत हर प्रकार की बाधा और संकट से रक्षा करता है। तो इस 10 अप्रैल को महादेव को प्रसन्न करने के लिए पूरे विधि विधान से ही पूजा करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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