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Pradosh Vrat 2021: आने वाला है जून का पहला प्रदोष व्रत, जानें तिथि, पूजा विधि और प्रदोष व्रत के लाभ

Mon, 31 May 2021 05:00 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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प्रदोष व्रत 2021
हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन प्रदोष व्रत किया जाता है जो भगवान शिव समर्पित होता है। प्रत्येक माह में दोनों पक्षों कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस तरह से एक माह में दो और पूरे वर्ष में 24 प्रदोष व्रत किए जाते हैं। इस बार ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी का प्रदोष व्रत 07 जून 2021 दिन सोमवार को किया जाएगा। इस बार का प्रदोष व्रत बहुत लाभकारी होगा क्योंकि इस बार सोमप्रदोष होगा और सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित किया जाता है। आइए जानते हैं प्रदोष व्रत की विधि,और लाभ
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प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
प्रदोष व्रत के लाभ
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत पूरे नियम के साथ करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा और मंत्र जाप करने से बिगड़े काम भी बनने लगते हैं। दिन के अनुसार प्रदोष व्रत का महत्व भी अलग हो जाता है। सोमप्रदोष व्रत से भगवान शिव असीम कृपा बरसाते हैं साथ ही आपका चंद्रमा भी मजबूत होता है।
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प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : google
प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ माह का प्रदोष व्रत 07 जून दिन सोमवार को किया जाएगा।
 
ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि आरंभ- 07 जून सुबह 08 बजकर 48 मिनट से
ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि समाप्त- 08 जून सुबह 11 बजकर 24 मिनट तक

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प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रदोष व्रत पूजा विधि-
  • प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में की जाती है।
  • शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का समय प्रदोष काल होता है।
  • त्रयोदशी तिथि को प्रातः जल्दी स्नानादि करने के पश्चात भगवान शिव के समक्ष धूप-दीप जलाएं और व्रत का संकल्प करें।
  • अब संध्या के समय प्रदोष काल में स्नान करने के बाद पूर्व मुख होकर पूजा करने के लिए बैठें।
  • सर्वप्रथम भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें और धूप-दीप जलाएं।
  • अब भगवान शिव और माता पार्वती को चंदन, पुष्प, अक्षत, दक्षिणा और नैवेद्य आदि चीजें अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान शिव के मंत्रो का जाप या शिव चालीसा का पाठ करें।
  • पाठ पूर्ण हो जाने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
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प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रदोष व्रत के नियम
  • शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत निर्जला किया जाता है।
  • प्रातः नित्यकर्म से निवृत्त होने के बाद व्रत का संकल्प करने के बाद दूध का सेवन करना चाहिए और उसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत करना चाहिए।
  • इस दिन फलाहार का विशेष महत्व होता है शाम को पूजन करने के बाद फलाहार किया जा सकता है।
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