नित्य श्राद्ध- पितृपक्ष के पूरे दिनों में हर रोज जल, अन्न, दूध और कुश से श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं।
नैमित्तिक श्राद्ध- माता-पिता की मृत्यु के दिन यह श्राद्ध किया जाता है। इसे एकोदिष्ट कहा जाता है।
काम्य श्राद्ध- यह श्राद्ध विशेष सिद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
वृद्धि श्राद्ध- सौभाग्य और सुख में कामना कामने के लिए वृद्धि श्राद्ध किया जाता है।
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