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Shradh Paksha 2020: जानें कब से हैं श्राद्ध पक्ष, इससे जुड़ी सारी जानकारी

Tue, 25 Aug 2020 06:50 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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श्राद्ध पक्ष 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
पितृदोष दूर करने और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पितृ पक्ष का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर किसी कारणवश आप अपने पितरों का श्राद्ध सही से नहीं कर पाते हैं, तो उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलती है जिसके कारण वे बंधनो से मुक्त नहीं हो पाते हैं और इसी लोक में भटकते रहते हैं। इससे आपको भी कई कष्टों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह से अगर किसी की अकाल मृत्यु हुई हो तो उसकी आत्मा की शांति भी नहीं हो पाती है, और ऐसे लोगों की आत्मा भटकती रहती है। पितृ तर्पण और उनकी आत्मा की शांति के लिए यह पक्ष बहुत महत्व होता है, आइए जानते हैं कब से शुरु है पितृपक्ष, क्या है इनका महत्व, और पितृ तर्पण करने की विधि...
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श्राद्ध पक्ष 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
पितृ पक्ष तिथि आरंभ और समापन तिथि

2 सितंबर 2020 से पितृपक्ष आरंभ हो जाएगा और 17 सितंबर 2020 को पितृपक्ष का समापन होगा। श्राद्ध का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या का दिन होता है। पितरों के तर्पण के लिए यह दिन भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
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श्राद्ध पक्ष 2020 पितृपक्ष का महत्व (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : SOCIAL MEDIA
पितृ पक्ष का महत्व
भाद्रपद माह की शुक्ल पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन माह के कृष्णपक्ष की अमावस्या तक पितृ पक्ष श्राद्ध लगता है। पितृदोष से मुक्ति के लिए इस माह मे पितरों का तर्पण करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। इससे जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं। कुंडली में लगने वाला पितृदोष व्यक्ति के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। ब्रह्म वैवर्त पुराण में बताया गया है कि देवताओं को प्रसन्न करने से पहले मनुष्य को अपने पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहिए। माना जाता है जिनके पूर्वज प्रसन्न होते हैं उनके जीवन में किसी प्रकार के कष्ट नहीं होते हैं। कहा जाता है कि इस समय पूर्वज पृथ्वी पर होते हैं, इसलिए पितृपक्ष में उनका श्राद्ध करने से वे अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
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श्राद्ध पक्ष 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
ऐसे करें अपने पितरों का तर्पण
पितृ पक्ष में जिस दिन आपको अपने पितरों का श्राद्ध कर्म करना हो उस दिन प्रातःकाल के समय उठकर व्यक्ति को साफ और स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए, श्राद्ध कर्म करते समय बिना सिले वस्त्र धारण करें जैसे धोती आदि। उसके बाद अपने पूर्वजों की पसंद का भोजन बनाकर उन्हें अर्पित करें। श्राद्ध में तिल, चावल और जौं को अवश्य शामिल करना चाहिए। अपने पितरों को पहले तिल अर्पण करें उसके बाद भोजन की पिंडी बनाकर चढ़ाएं। पितृपक्ष में कोऔं को पितरो का रुप माना जाता है इसलिए कोऔं को भोजन अवश्य डालें। गरीब और जरुरतमंद को दान करें। भांजे-भांजी को भोजन करवाएं।
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