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Pitru Paksha 2025:आज से पितृपक्ष शुरू, चंद्र ग्रहण के बीच जानें श्राद्ध व तर्पण का सही तरीका

Sun, 07 Sep 2025 07:20 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Shradh Purnima 2025: इस बार पितृपक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू हो रहा है, जब भाद्रपद पूर्णिमा के साथ ही पूर्ण चंद्र ग्रहण भी लगेगा। वहीं इसका समापन 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा, जब सूर्य ग्रहण भी घटित होगा।
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Pitru Paksha 2025 - फोटो : अमर उजाला
Pitru Paksha Purnima: पितृपक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है और इसे पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। इन 16 दिनों के दौरान लोग तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे कर्मकांड करके पितरों को स्मरण करते हैं।
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इस बार पितृपक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू हो रहा है, जब भाद्रपद पूर्णिमा के साथ ही पूर्ण चंद्र ग्रहण भी लगेगा। वहीं इसका समापन 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा, जब सूर्य ग्रहण भी घटित होगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग अत्यंत दुर्लभ है, क्योंकि ऐसा योग पूरे 122 साल बाद बन रहा है। यही कारण है कि इस बार का पितृपक्ष विशेष महत्व रखता है।Pitru Paksha 2025: पितरों को अर्पित न करें ये सब्जियां, असंतुष्ट रह जाते हैं पितृ
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चंद्र ग्रहण का समय और प्रभाव - फोटो : adobe
चंद्र ग्रहण का समय और प्रभाव
इस साल पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही एक विशेष खगोलीय घटना भी देखने को मिलेगी। 7 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जो भारत सहित एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, अमेरिका और न्यूजीलैंड तक दिखाई देगा। यह ग्रहण रात 9:57 बजे शुरू होकर 8 सितंबर की रात 1:26 बजे तक चलेगा। करीब 3 घंटे 28 मिनट तक चलने वाले इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा और लालिमा लिए हुए नज़र आएगा, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
इसके बाद 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण भी पड़ेगा, लेकिन यह भारत में नहीं दिखेगा। यह दृश्य केवल न्यूजीलैंड, फिजी, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के कुछ दक्षिणी इलाकों में ही देखने को मिलेगा।
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सूतक 7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से शुरू होकर ग्रहण समाप्त होने तक चलेगा। - फोटो : adobe
सूतक काल और धार्मिक मान्यता
चंद्र ग्रहण के साथ ही सूतक काल का महत्व भी बढ़ जाता है। यह सूतक 7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से शुरू होकर ग्रहण समाप्त होने तक चलेगा। परंपरा के अनुसार, इस अवधि में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्मकांड नहीं किए जाते। जिन लोगों का श्राद्ध पूर्णिमा तिथि पर होता है, उन्हें दोपहर 12:57 बजे से पहले अपने सभी कर्मकांड पूरे कर लेने चाहिए।
हालांकि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण है, ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इसका पितृपक्ष की विधियों पर कोई विशेष बाधा नहीं डालेगा। फिर भी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में भोजन बनाना, खाना और किसी भी प्रकार का शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।

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पितृपक्ष में तर्पण का विशेष महत्व माना गया है। - फोटो : freepik
पितरों का तर्पण कब और कैसे करें?
पितृपक्ष में तर्पण का विशेष महत्व माना गया है। यह न सिर्फ पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है, बल्कि पितृ दोष से मुक्ति पाने का उपाय भी है। सही समय, स्थान और विधि से किया गया तर्पण पुण्यदायी माना जाता है।
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श्राद्ध करने वाले लोगों को 7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से पहले तर्पण कर लेना चाहिए। - फोटो : Amar Ujala
तर्पण का समय
तर्पण का सबसे शुभ समय दोपहर के बाद माना गया है। कुतुप मुहूर्त (सुबह 11:30 से दोपहर 12:30) और रौहिण मुहूर्त (12:30 से 1:30) तर्पण के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं। इस बार पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण होने के कारण श्राद्ध करने वाले लोगों को 7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से पहले तर्पण कर लेना चाहिए।
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गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों के तट पर तर्पण करना सबसे शुभ है। - फोटो : Amar Ujala
तर्पण का स्थान
परंपरा के अनुसार गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों के तट पर तर्पण करना सबसे शुभ है। यदि नदी किनारे जाना संभव न हो, तो घर पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण किया जा सकता है।
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अंजलि में जल, तिल और चावल लेकर तीन बार ‘ॐ पितृभ्य: नम:’ मंत्र का उच्चारण करें। - फोटो : Amar Ujala
तर्पण करने की विधि
  • सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ सफेद वस्त्र पहनें।
  • जनेऊ धारण करने वाले इसे दाहिने कंधे पर रखें।
  • एक लोटे में जल भरकर उसमें काले तिल और चावल डालें।
  • दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • हाथों में कुश की अंगूठी धारण करें।
  • अंजलि में जल, तिल और चावल लेकर तीन बार ‘ॐ पितृभ्य: नम:’ मंत्र का उच्चारण करें।
  • इसके बाद अपने गोत्र और पितरों का नाम लेते हुए जल भूमि पर अर्पित करें।
  • तर्पण के बाद गरीबों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी है।
  • गाय, कुत्ते और पक्षियों को भोजन खिलाना भी शुभ माना जाता है।
  • ग्रहण काल में घर की दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है।तैयारी
     
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ग्रहण के समय गर्भवती स्त्रियों को बाहर निकलने से बचना चाहिए। - फोटो : Freepik.com
तर्पण के दौरान बरतें ये सावधानियां
  • इस दौरान तर्पण, श्राद्ध या पिंडदान करना वर्जित माना गया है। इसलिए इन कर्मकांडों से बचें।
  • तर्पण करते समय हमेशा शुद्ध जल और काले तिल का ही इस्तेमाल करें। बासी या दूषित चीजें प्रयोग न करें।
  • श्राद्ध या तर्पण किसी और की भूमि पर न करें। सबसे अच्छा है कि यह अनुष्ठान किसी पवित्र तीर्थ, मंदिर या नदी के तट पर किया जाए।
  • ग्रहण के समय गर्भवती स्त्रियों को बाहर निकलने से बचना चाहिए, क्योंकि इस अवधि को संवेदनशील माना जाता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 
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