पितृ पक्ष
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श्राद्ध पक्ष में तिथि के अनुसार श्राद्ध के नियम
- जिस तिथि को परिजन का निधन हुआ हो, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है।
- उदाहरण के लिए, यदि किसी की मृत्यु पंचमी तिथि को हुई है, तो पितृ पक्ष में पंचमी के दिन उनका श्राद्ध करना चाहिए।
- अगर पूर्वज की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और पिंडदान किया जा सकता है।
- पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है।
- धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- पितरों की कृपा से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहने की मान्यता है।
- श्राद्ध कर्म के दौरान दान-पुण्य और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।