पितृ पक्ष को पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, तर्पण और श्राद्ध करने का विशेष समय माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जन्म कुंडली में सूर्य का राहु या केतु के साथ विशेष संबंध बनने पर पितृ दोष की स्थिति मानी जा सकती है। इसे पितृ ऋण से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता में पितृ दोष को विवाह, संतान, करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन से जुड़ी परेशानियों से जोड़ा जाता है। हालांकि, ये ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कारण नहीं हैं। पितृ पक्ष के दौरान तर्पण, श्राद्ध, दान और पितरों का स्मरण करने की परंपरा है। आइए जानते हैं पितृ दोष से जुड़े कौन-कौन से उपाय किए जाते हैं।