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पितृ पक्ष 2026: बिना पंडित और कम सामग्री में घर पर करें श्राद्ध, जानें सरल विधि

Sat, 12 Sep 2026 01:43 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

पितृ पक्ष 2026 में अगर आप घर पर ही पितरों का श्राद्ध करना चाहते हैं, तो इसके लिए बहुत ज्यादा सामग्री या जटिल विधि जरूरी नहीं है। श्रद्धा और नियमों का ध्यान रखते हुए सामान्य पूजा सामग्री से भी तर्पण और श्राद्ध किया जा सकता है। जानें घर पर श्राद्ध करने की आसान विधि।
 
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पितृ पक्ष 2026 - फोटो : amar ujala

पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और स्मरण का समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करते हैं। कई बार ऐसी परिस्थिति आ जाती है जब श्राद्ध के लिए पंडित उपलब्ध नहीं हो पाते या पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री जुटाना संभव नहीं होता। ऐसे में लोग सोचते हैं कि पितरों के निमित्त कर्म कैसे किया जाए। धार्मिक परंपराओं में श्राद्ध की विस्तृत विधि और मंत्रों का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, यदि किसी कारण से पूरी विधि संभव न हो तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सरल तरीके से पितरों का स्मरण, जल तर्पण और अन्न अर्पण किया जा सकता है। आइए जानते हैं पितृ पक्ष में घर पर सरल रूप से क्या किया जा सकता है।

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पितृ पक्ष - फोटो : adobe stock

पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू होगा?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध से होगी। इसके बाद 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध शुरू होगा और अलग-अलग तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाएगा। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्तूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। जिन पितरों की श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है।

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पंडित उपलब्ध न हों तो क्या करें? - फोटो : freepik

पंडित उपलब्ध न हों तो क्या करें?
श्राद्ध कर्म की विस्तृत वैदिक या पारंपरिक विधि के लिए आचार्य या पुरोहित की सहायता लेना उचित माना जाता है। लेकिन अगर किसी वजह से पंडित उपलब्ध नहीं हैं, तो पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए सरल तर्पण किया जा सकता है। इसके लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और घर में साफ-सुथरी एवं शांत जगह पर बैठें। जिस पूर्वज का स्मरण करना है, उन्हें मन में याद करें और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करें। इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार जल अर्पित किया जा सकता है। यदि संभव हो तो इस दिन घर में सात्विक भोजन तैयार करें और भोजन का एक हिस्सा पितरों के निमित्त अलग रखें।

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कम सामग्री में कैसे करें तर्पण? - फोटो : adobe stock

कम सामग्री में कैसे करें तर्पण?

  • श्राद्ध के लिए यदि आपके पास सभी पूजन सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
  • सरल तर्पण के लिए साफ जल और काले तिल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • एक स्वच्छ पात्र में जल लें और उसमें थोड़े काले तिल डालें।
  • इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें।
  • जिन लोगों को तर्पण की पारंपरिक मंत्र-विधि मालूम हो, वे अपनी परंपरा के अनुसार उसका पालन कर सकते हैं।
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श्राद्ध वाले दिन सुबह स्नान करके पूजा या तर्पण के लिए साफ स्थान तैयार करें। - फोटो : adobe stock
घर पर सरल श्राद्ध कैसे करें?
  • श्राद्ध वाले दिन सुबह स्नान करके पूजा या तर्पण के लिए साफ स्थान तैयार करें।
  • शांत मन से अपने पितरों का ध्यान करें और उनके नाम तथा परिवार से उनके संबंध का स्मरण करें।
  • इसके बाद जल में काले तिल मिलाकर तर्पण करें।
  • यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में पिंडदान किया जाता है और आवश्यक सामग्री उपलब्ध है, तो उसी परंपरा के अनुसार पिंड तैयार किया जा सकता है।
  • कई परंपराओं में पिंड तैयार करने के लिए चावल, तिल, जौ, दूध, घी या शहद जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है।
  • हालांकि हर परिवार में इसकी विधि एक जैसी नहीं होती, इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार ही सामग्री का इस्तेमाल करना उचित रहेगा।
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पितरों के नाम से भोजन और दान करें - फोटो : adobe stock
पितरों के नाम से भोजन और दान करें
  • श्राद्ध के दिन घर में सात्विक भोजन तैयार करके पितरों के निमित्त अर्पित करने की परंपरा है।
  • कई परिवारों में भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौए या कुत्ते को देने की परंपरा है।
  • यदि आपके घर में भी ऐसी मान्यता है तो उसका पालन कर सकते हैं।
  • इसके अलावा किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या अन्न का दान करना भी किया जा सकता है।
  • दान में चावल, आटा, दाल, फल, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार रोजमर्रा की उपयोगी वस्तुएं दी जा सकती हैं।
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पारंपरिक श्राद्ध कर्म में संकल्प, मंत्र, पिंडदान, तर्पण और अन्य धार्मिक प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। - फोटो : freepik

क्या बिना पंडित के श्राद्ध करना मान्य है?
पारंपरिक श्राद्ध कर्म में संकल्प, मंत्र, पिंडदान, तर्पण और अन्य धार्मिक प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में योग्य आचार्य की सहायता लेना बेहतर माना जाता है। लेकिन यदि किसी विशेष परिस्थिति में पंडित उपलब्ध नहीं हो पाते, तो पितरों को श्रद्धापूर्वक याद करना, जल तर्पण करना, अन्न अर्पित करना, जरूरतमंदों को भोजन कराना और दान-पुण्य करना किया जा सकता है।

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पितृ पक्ष में कर्मकांड के साथ श्रद्धा और सम्मान को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। - फोटो : adobe stock

श्राद्ध में सबसे जरूरी क्या है?
पितृ पक्ष में कर्मकांड के साथ श्रद्धा और सम्मान को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए अगर किसी कारण से सभी सामग्री उपलब्ध नहीं हो पाती, तो इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार जो संभव हो, उसे श्रद्धापूर्वक करना बेहतर है। यदि आपके परिवार में श्राद्ध की कोई विशेष परंपरा या कुलाचार है, तो उसे प्राथमिकता दें। और यदि विस्तृत विधि को लेकर कोई संदेह हो, तो किसी योग्य पुरोहित या आचार्य से सलाह लेना सबसे उचित रहेगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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