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Sarva Pitru Amavasya 2025: आज सर्वपितृ अमावस्या पर ये उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद

Sun, 21 Sep 2025 07:04 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पितृपक्ष का समापन 21 सितंबर को सर्व पितृ अमावस्या के दिन होगा। यह दिन पूर्वजों को विदा करने का अंतिम अवसर होता है। इस दिन विशेष उपायों से न केवल पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि माता लक्ष्मी की कृपा भी मिलती है। आइए जानते हैं इस दिन कौन से उपाय किए जा सकते हैं। 
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Sarva Pitru Amavasya 2025: - फोटो : adobe stock
Sarva Pitru Amavasya 2025: आज सर्वपितृ अमावस्या की तिथि है। सनातन परंपरा में पितृपक्ष का अत्यंत गहरा महत्व माना गया है। 15 दिन का यह समय केवल पूर्वजों की स्मृति के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी आत्मा की शांति और तृप्ति का भी प्रतीक होता है। इस अवधि में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध जैसे कर्मकांड किए जाते हैं। माना जाता है कि इन दिनों पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों की रक्षा करते हुए उनके दुखों को दूर करते हैं। इस वर्ष पितृपक्ष का समापन 21 सितंबर को सर्व पितृ अमावस्या के दिन होगा। यह दिन पूर्वजों को विदा करने का अंतिम अवसर होता है। इस दिन विशेष उपायों से न केवल पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि माता लक्ष्मी की कृपा भी मिलती है। आइए जानते हैं इस दिन कौन से उपाय किए जा सकते हैं। 
Shradh Paksha 2025: केवल कर्तव्य नहीं स्मरण और श्रद्धा का पर्व है पितृपक्ष, जानें इसका महत्व
 
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दीपदान - फोटो : adobe stock
दीपदान 
इस दिन सूर्यास्त के बाद घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में शुद्ध घी का दीपक जलाना बहुत शुभ माना गया है। दीपक में थोड़े काले तिल डालना और प्रज्वलित करना पितरों की शांति के लिए उत्तम उपाय है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और धन की वृद्धि होती है।
 
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ब्राह्मण भोज और दान - फोटो : adobe stock
ब्राह्मण भोज और दान
पितृपक्ष की अमावस्या पर ब्राह्मणों को आमंत्रित करके भोजन कराना विशेष फलदायी माना गया है। भोजन में पितरों की पसंदीदा वस्तुएं शामिल करें और भोजन उपरांत दक्षिणा, वस्त्र अथवा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें। इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देकर वंशजों की समृद्धि सुनिश्चित करते हैं।
Sarva Pitru Amavasya 2025: 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या, पितरों को प्रसन्न करने वाले दान और उनका महत्व

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तुलसी पूजन - फोटो : freepik
पंचबलि का अनुष्ठान
इस दिन पंचबलि का महत्व बताया गया है। इसमें गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं और चींटियों के लिए भोजन निकालकर अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि यह अनुष्ठान पितरों को तृप्त करता है और उनके दोषों का प्रभाव कम होता है।

तुलसी पूजन
शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना भी बेहद शुभ माना गया है। तुलसी माता लक्ष्मी का स्वरूप है और यह उपाय परिवार के लिए सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
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पीपल वृक्ष की परिक्रमा - फोटो : freepik
पीपल वृक्ष की परिक्रमा
सर्व पितृ अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा और दीपदान का विशेष महत्व है। पीपल में देवताओं और पितरों का निवास बताया गया है। इसके नीचे दीपक जलाकर परिक्रमा करने से पितृ दोष का निवारण होता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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