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Pitru Paksha 2022: महिलाएं भी कर सकती हैं पिंडदान,बस इन नियमों का करें पालन

Tue, 20 Sep 2022 10:17 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महिलाएं भी कर सकती हैं पिंडदान - फोटो : अमर उजाला
Women Can do Pinddan: सनातन हिंदु धर्म में श्राद्ध का बहुत महत्व है। पितरों के लिए ये पक्ष समर्पित माना जाता है। श्राद्ध पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन दिनों पितृ, पितृलोक से मृत्यु लोक में अपने वंशजों से सूक्ष्म रूप में मिलने आते हैं और हम उनके सम्मान में अपनी सामर्थ्यनुसार उनका स्वागत-सत्कार करते हैं। मान्यता है कि सभी पितृ अपनी पसंद का भोजन व सम्मान पाकर प्रसन्न होते हैं और यदि उन्हें संतुष्टि मिलती है तो वे परिवार के सदस्यों को दीर्घायु, वंशवृद्धि व अनेक प्रकार के आशीर्वाद देकर पितृलोक लौट जाते हैं। इस वर्ष पितरों का श्राद्ध कर्म 10 सितंबर से 25 सितंबर तक रहेगा। श्राद्ध पितरों की तिथि के अनुसार किया जाता है।क्या महिलाएं भी श्राद्ध कर सकती हैं। हां, लेकिन कुछ नियमों को ध्यान में रखते हुए महिलाओं को श्राद्ध करना चाहिए। आइए जानते हैं क्या है वो नियम। 
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महिलाएं कर सकती हैं पिंडदान - फोटो : अमर उजाला
महिलाएं कर सकती हैं पिंडदान
गरुड़ पुराण के अनुसार महिलाएं भी पिंडदान कर सकती हैं। लेकिन इसके कुछ नियम है। आइए जानते हैं क्या हैं वो नियम: 
  • अगर किसी व्यक्ति के पुत्र नहीं हैं, तो ऐसे में परिवार की महिलाएं यानी पुत्री, पत्नी और बहू अपने पिता के श्राद्ध और पिंड का दान कर सकती हैं। 
  • गरुड़ पुराण की मान्यता के अनुसार अगर कोई पुत्री सच्चे मन से अपने पिता का श्राद्ध करती है तो पुत्र के न होने पर भी पिता उसे स्वीकार कर आशीर्वाद देता है। 
  • यदि किसी के परिवार में श्राद्ध के समय पुरुष अनुपष्ठी हैं तो इस स्थिति में भी महिलाएं पिंड दान कर सकती हैं। 
  • कुछ धार्मिक ग्रंथ जैसे धर्मसिंधु ग्रंथ, मनुस्मृति, वायु पुराण, मार्कंडेय पुराण और गरुड़ पुराण में महिलाओं को तर्पण और पिंडदान करने का अधिकार बताया गया है। 
  • वाल्मीकि रामायण में भी सीता जी ने राजा दशरथ का पिंड दान किया था।
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इन बातों का रखें ध्यान  - फोटो : गूगल
इन बातों का रखें ध्यान 
  • श्राद्ध करते समय महिलाओं को सफेद और पीले रंग के वस्त्र धरण करने चाहिए। 
  • धार्मिक मान्यता की मानें तो केवल विवाहित महिलाओं को ही श्राद्ध करना चाहिए। 
  • महिलाएं तर्पण करते समय ध्यान रखें कि वे कुश, जल और काले तिल डालकर तर्पण नहीं कर सकती। 
  • यदि श्राद्ध तिथि याद न हो तो नवमी को वृद्ध स्त्री-पुरुषों का तथा पंचमी को संतान का श्राद्ध करें।
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महिलाएं भी कर सकती हैं पिंडदान - फोटो : अमर उजाला
यदि पुत्र न हो तो कौन कौन कर सकता है श्राद्ध 
  • यदि पुत्र नहीं है और कोई किसी बच्चे (पुत्र या पुत्री )को गोद लिया है तो वह श्राद्ध कर सकते हैं। 
  • पुत्र न होने पर ही पति अपनी पत्नी का श्राद्ध कर सकता है। 
  • यदि पुत्र, पौत्र या पुत्री के पुत्र न हो तो भतीजा या भतीजी भी श्राद्ध कर सकते हैं। 
  • यदि मृत व्यक्ति का कोई बेटा और बेटी नहीं है और पत्नी की भी मृत्यु हो चुकी है तो ऐसी स्थिति में भाई, पोते, नाती, भांजे या भतीजे भी श्राद्ध करने के हकदार हैं। 
  • यदि परिवार में कोई भी नहीं है तो सिर्फ शिष्य, मित्र, रिश्तेदार या परिवार के पुजारी ही श्राद्ध कर सकते हैं। यह स्त्री या पुरुष कोई भी हो सकते हैं। 
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