पितृपक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। पितृपक्ष में अपने पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति श्रद्धा का भाव रखने और तर्पण करने का समय होता है। पितृपक्ष 16 दिनों तक चलता है। अभी पितृपक्ष चल रहें और 17 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन इसका समापन होगा। मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरों को दिया गया भोजन और तर्पण उनको जरूर पहुंचता है। पितृपक्ष में पितर देव ब्राह्राण और पशु पक्षियों के रूप में अपने परिजनों के द्वारा दिए गए अर्पण को स्वीकार कर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में पितरों का तर्पण जरूर करना चाहिए नहीं तो पितृदोष लगता है। मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पूर्वज अपने परिजनों के सपने में आकर कुछ खास संकेत देते हैं।