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Paush Purnima 2021: पौष पूर्णिमा आज, बन रहा है ये शुभ योग, जानें मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व

Thu, 28 Jan 2021 07:10 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पौष पूर्णिमा 2021 - फोटो : अमर उजाला
Paush Purnima 2021: पौष माह शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पौष पूर्णिमा तिथि कहलाती है। इस साल यह तिथि 28 जनवरी यानी आज है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पौष पूर्णिमा के दिन व्रत, गंगा स्नान एवं दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, जप और व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और मोक्ष मिलता है। आइए जानते हैं पूर्णिमा व्रत का मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व।
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पौष पूर्णिमा 2021 व्रत मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला
पौष पूर्णिमा 2021 मुहूर्त (Paush Paush Purnima 2021 muhurat timing)
पूर्णिमा तिथि 28 जनवरी 2021 गुरुवार को 01:18 से शुरु होकर 29 जनवरी 2021 शुक्रवार की रात 12:47 तक रहेगी।
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हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस बार पौष पूर्णिमा के दिन गुरु पुष्य योग बन रहा है। - फोटो : अमर उजाला
इस बार बन रहा है ये खास योग
पौष पूर्णिमा पर इस बार खास संयोग बन रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस बार पौष पूर्णिमा के दिन गुरु पुष्य योग बन रहा है जिसके कारण इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस दिन यह योग सूर्योदय से लेकर मध्यरात्रि तक विद्यमान रहेगा। विवाह को छोड़कर अन्य कोई भी कार्य आरंभ करना हो तो पुष्य नक्षत्र में करना शुभ होता है। इसके साथ ही इस दिन सर्वाथ सिद्धि योग और प्रीति योग भी बन रहे हैं। 

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पौष पूर्णिमा से ही कल्पवास शुरु हो जाता है जो माघ मास की पूर्णिमा को समाप्त होता है। - फोटो : सोशल मीडिया
कल्वास होगा शुरु
पौष पूर्णिमा से ही कल्पवास शुरु हो जाता है जो माघ मास की पूर्णिमा को समाप्त होता है। मान्यता है कि कल्पवासी जीवन मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाने की कामना करते हैं। यह परंपरा आदि काल से निरंतर चली आ रही है। कल्पवास का महत्व हमारे पौराणिक ग्रंथों में अलग-अलग रूपों में मिलता है। 
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पौष पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान से पहले व्रत का संकल्प लें। - फोटो : सोशल मीडिया
व्रत विधि
  • पौष पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान से पहले व्रत का संकल्प लें।
  • पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें और स्नान से पूर्व वरुण देव को प्रणाम करें।
  • स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • स्नान से निवृत्त होकर भगवान मधुसूदन की पूजा करें।
  • उन्हें नैवेद्य अर्पित करें।
  • ब्राह्मणों और गरीबों में दान-दक्षिणा दें।
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दान
पूर्णिमा के दिन इन वस्तुओं का करें दान
दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र विशेष रूप से देने चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि दान केवल जरुरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए। 
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पौष पूर्णिमा पर स्नान करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
पौष पूर्णिमा तिथि का महत्व
पौष पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने संपूर्ण रूप में होता है जिसका प्रभाव व्यक्ति के मन मस्तिष्क में पड़ता है। ज्योतिष में चंद्रमा का मन एवं द्रव्य पदार्थों का कारक माना जाता है। पौष पूर्णिमा के बाद से माघ माह प्रारंभ हो जाता है, इसलिए पूर्णिमा के दिन से ही प्रयाग राज में संगम तट पर माघ मेला शुरु हो जाता है, जिसमें देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु संगम तट पर डुबकी लगाते हैं। संगम नगरी में यह मेला शिवरात्रि तक चलता है। 
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