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Paush Month 2025 Upay: 5 दिसंबर से शुरू होगा पौष माह, भाग्य प्रबलता के लिए करें ये पांच उपाय

Wed, 03 Dec 2025 04:17 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Paush Month Remedies: इस साल पौष माह 5 दिसंबर से आरंभ होकर 3 जनवरी 2025 को समाप्त होगा। यह महीना हेमंत ऋतु के अंतर्गत आता है, इसलिए ठंड अधिक रहती है। इस अवधि में कई व्रत और त्योहार पड़ते हैं, मगर मंगल कार्य, जैसे विवाह या नए शुभारंभ, इस समय नहीं किए जाते। आइए विस्तार से जानते हैं...
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पौष माह सफलता के लिए 5 सरल उपाय - फोटो : Amar Ujala
Paush Month 2025 Upay In Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह की शुरुआत 5 दिसंबर 2025 से होने वाली है। यह हिंदी वर्ष का दसवां महीना माना जाता है। इस अवधि में सूर्यदेव की विशेष पूजा का महत्व बताया गया है। पितरों की शांति के लिए इस महीने में पिंडदान और श्राद्ध कर्म करना शुभ माना जाता है। पौष में सूर्य की गति मन्द पड़ने से खरमास भी लगता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। हालांकि इस दौरान कुछ विशेष उपाय करके आप सूर्यदेव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। 

पंचांग के मुताबिक पौष मास 5 दिसंबर से आरंभ होकर 3 जनवरी 2025 को समाप्त होगा। यह महीना हेमंत ऋतु के अंतर्गत आता है, इसलिए ठंड अधिक रहती है। इस अवधि में कई व्रत और त्योहार पड़ते हैं, मगर मंगल कार्य, जैसे विवाह या नए शुभारंभ, इस समय नहीं किए जाते।

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सूर्यदेव की उपासना  - फोटो : Adobe Stock

पौष माह के उपाय

सूर्यदेव की उपासना 
पौष मास में प्रतिदिन स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना गया है। जल में लाल पुष्प, लाल चंदन और अक्षत डालकर सूर्यदेव को अर्पित करें और किसी भी सूर्य मंत्र का जप करें। माना जाता है कि इससे कार्य-सिद्धि, मान-सम्मान और पद में वृद्धि होती है।
 
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जरूरतमंदों को दान - फोटो : adobe stock
गरम वस्त्रों का दान
जाड़े के मौसम में जरूरतमंदों को गर्म कपड़े, कंबल, गुड़ आदि दान करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। ऐसा करने से सुख-शांति बढ़ती है और सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होती है।

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खिचड़ी का भोग - फोटो : adobe stock
खिचड़ी का भोग
इस माह सूर्यदेव को तिल और चावल से बनी खिचड़ी का भोग लगाना शुभ माना गया है। साथ ही लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करना भी उत्तम है, क्योंकि इन्हें सूर्य का प्रिय रंग माना जाता है। इससे भाग्य बलवान होने का विश्वास है।

रविवार व्रत और नमक का त्याग 
पौष मास के हर रविवार व्रत रखकर सूर्यदेव की आराधना करें। व्रत के दौरान नमक का सेवन न करें और मिठाई या मीठा भोजन ग्रहण करें। इससे सूर्य का प्रभाव कुंडली में मजबूत होता है और सौभाग्य बढ़ता है।
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खरमास - फोटो : Adobe Stock
नया कार्य आरंभ न करें
पौष और खरमास के समय कोई भी मांगलिक कार्य या नया शुभ आरंभ नहीं किया जाता। इसलिए नए कार्य को अगले माह तक स्थगित करना ही उचित माना गया है।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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