फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Parshuram Jayanti: 2020: न्याय के देवता भगवान परशुराम की पूजा करती है सभी कष्टों का निवारण

विज्ञापन
1 of 5
Parshuram Jayanti 2020
Parshuram jayanti 2020 : आज परशुराम जयंती है। वैसे परशुराम जयंती हर वर्ष वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाती है, लेकिन कुछ पंचांग में भेद होने के कारण भगवान परशुराम की जयंती 25 अप्रैल को भी मनाई जा रही है। कहीं-कहीं पर 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन भी मनाई जाएगी।  भगवान परशुराम सात चिरंजीवियों अश्वत्थामा, राजा बलि, परशुराम, विभीषण, महर्षि व्यास, हनुमान, कृपाचार्य इनमें से एक हैं। भगवान विष्णु के छठे अवतार एवं ब्राह्म्ण जाति के कुल गुरु परशुराम, जिनकी जयंती वैशाख शुक्ल अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाती है। मत्स्य पुराण के अनुसार इस दिन जो कुछ भी दान किया जाता है वह अक्षय रहता है यानि इस दिन किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता है। सतयुग का प्रारंभ अक्षय तृतीया से ही माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के परम भक्त परशुराम न्याय के देवता हैं,जिन्होंने 21 बार इस पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया था। 

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से हुआ। यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को एक बालक का जन्म हुआ था। वह भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम, जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण करने के कारण वह परशुराम कहलाए।
विज्ञापन

2 of 5
Lord Parshuram - फोटो : Social media
जब माता पृथ्वी ने श्री विष्णु से की विनती
पुराणों के अनुसार कार्तवीर्य अर्जुन नाम का राजा था जो महिष्मती नगरी पर शासन करता था। राजा कार्तवीर्य और उसके अनेकों सहयोगी क्षत्रिय राजा मित्र विनाशकारी कार्यों में लिप्त थे और वह सब मिलकर अकारण ही निर्बलों पर अत्याचार करते थे। उनके अनाचार और अत्याचार से सभी जगह हाहाकार मच गया,निर्दोष जीवों के लिए जीना कठिन हो गया। इस सबसे दुखी होकर माता पृथ्वी ने भगवान नारायण से पृथ्वी और निर्दोष प्राणियों की सहायता करने के लिए विनती की। माता पृथ्वी की मदद के लिए भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में देवी रेणुका और ऋषि जमदग्नि के पुत्र के रूप में अवतार लिया।भगवान परशुराम ने कार्तवीर्य अर्जुन तथा सभी अनाचारी राजाओं का अपने फरसे से वध कर माता पृथ्वी को उनकी हिंसा और क्रूरता से मुक्त कराया।
विज्ञापन

3 of 5
Parshuram Jayanti 2020
क्षत्रियों राजाओं का 21 बार किया संहार-
परशुराम जी का उल्लेख रामायण, महाभारत, भागवत पुराण और कल्कि पुराण इत्यादि अनेक ग्रन्थों में किया गया है। जब परशुराम का धरती पर जन्म हुआ तब उस समय दुष्ट प्रवृत्ति के राजाओं का बोलबाला था। वे अहंकारी और दुष्ट क्षत्रियों का पृथ्वी से 21 बार संहार करने के लिए प्रसिद्ध हैं एवं वह दुष्टता करने वालों को क्षमा नहीं करते थे। भगवान परशुराम वह कर्ण के गुरु भी थे।  

4 of 5
Parshuram Jayanti 2020
गणेश जी को बनाया एकदंत
यही नहीं इनके क्रोध से  शिव-गौरी नंदन भगवान गणेश भी नहीं बच पाये थे। परशुराम ने अपने फरसे से वार कर भगवान गणेश के एक दांत को तोड़ दिया था जिसके कारण से भगवान गणेश एकदंत कहलाए जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
Parshuram Jayanti 2020
ऐसे करें श्री परशुरामजी की पूजा
परशुराम जयंती के दिन प्रात: काल उठकर नित्य कर्म से निवृत होकर गंगाजल मिले जल से  स्नान करना अति शुभ माना गया है। उसके बाद पूजा स्थल को शुद्ध कर करके उत्तर या पूर्व मुखी होकर आसन पर बैठ जाये। फिर चौकी या लकड़ी के पाटिये पर श्री परशुराम जी की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें। पूजा में भगवान विष्णु या परशुरामजी को चन्दन,तुलसी,कुमकुम,अक्षत,फल-फूल और मिठाई चढ़ाकर भक्ति-भाव से पूजन करना चाहिए। धूपबत्ती,कपूर और शुद्ध घी का दीपक का दीपक प्रज्वलित कर आरती करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार श्री हरि के अवतार विष्णुजी की पूजा-आराधना करने से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है एवं मनुष्य के जीवन में से संकट दूर होकर उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें