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आज भी जीवित है ये योद्धा, जिसने धरती को 21 बार किया क्षत्रिय विहीन और गणेश जी का तोड़ा था एक दांत

Wed, 18 Apr 2018 09:58 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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कलयुग में आज भी ऐसे 8 चिरंजीव देवता और महापुरुष है जो जीवित हैं। इन्हीं 8 चिरंजीवियों में एक भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम भी हैं। अक्षय तृतीया के दिन ही इनकी जयंती मनाई जाती है। भगवान शिव के परमभक्त परशुराम न्याय के देवता हैं, इन्होंने 21 बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन किया था। यही नहीं इनके क्रोध से भगवान गणेश भी नहीं बच पाये थे।
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आज्ञाकारी संतान भगवान परशुराम ने अपने माता-पिता के अपमान का बदला लेने के लिए 21 बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन कर दिया था। दरअसल हैहय वंश के राजा सहस्त्रार्जुन ने अपने बल और घमंड के कारण लगातार ब्राह्राणों और ऋषियों पर अत्याचार कर रहा था।
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एक बार सहस्त्रार्जुन सेना सहित भगवान परशुराम के पिता जमदग्रि मुनी के आश्रम में पहुंचा। मुनि ने कामधेनु गाय के दूध से समस्त सेना का आदार सत्कार किया। लेकिन चमत्कारी कामधेनु गाय को उसने बलपूर्वक छीन लिया। जब यह बात परशुराम को पता चली तो उन्होंने सहस्त्रार्जुन का वध कर दिया। 

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सहस्त्रार्जुन के पुत्रों ने बदला लेने के लिए परशुराम के पिता का वध कर दिया और माता पति के वियोग में चिता पर सती हो गयीं। बाद में पिता के शरीर पर 21 घाव को देखकर परशुराम ने शपथ ली कि वह इस धरती से समस्त क्षत्रिय वंशों का संहार कर देंगे। इसके बाद पूरे 21 बार उन्होंने पृथ्वी से क्षत्रियों का विनाश कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की।
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ब्रह्रावैवर्त पुराण के अनुसार, एक बार परशुराम भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे, लेकिन भगवान गणेश ने उन्हें मिलने नही दिया। इस बात से क्रोधित होकर उन्होंने अपने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत तोड़ दिया था। इस कारण से भगवान गणेश एकदंत कहलाने लगे।
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